कांग्रेस की कांफ्रेंस रद्द होने के बाद पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाएं पहले भी होती रही हैं। हालांकि कांफ्रेंस रद्द करने का स्पष्ट कारण कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चुनावी साल में मालवा की राजनीतिक नब्ज टटोलने वाले ऐतिहासिक छपार मेले का सियासी मंच इस बार असामान्य रूप से खाली नजर आ रहा है। पहले सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने पारंपरिक राजनीतिक कांफ्रेंस से दूरी बनाई और अब कांग्रेस ने भी ऐन वक्त पर अपनी कांफ्रेंस रद्द कर दी है। ऐसे में 26 सितंबर को मेले में मुख्य सियासी मुकाबला शिरोमणि अकाली दल और अकाली दल वारिस पंजाब दे के बीच रहने की संभावना है।
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छपार मेला लंबे समय से मालवा में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के बड़े मंच के रूप में जाना जाता है। चुनावी साल में यहां जुटने वाली भीड़ को दल अपनी जमीनी पकड़ दिखाने के तौर पर पेश करते रहे हैं। इस बार एक के बाद एक बड़े दलों के पारंपरिक मंच से पीछे हटने से मेले का सियासी रंग बदल गया है।
कांग्रेस की कांफ्रेंस रद्द होने के बाद पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाएं पहले भी होती रही हैं। हालांकि कांफ्रेंस रद्द करने का स्पष्ट कारण कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है। गुटबाजी के कारण अपेक्षित भीड़ न जुटने की आशंका की चर्चा भी है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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अकाली दल के दाखा प्रभारी जसकरण सिंह देओल ने पहले आप और वारिस पंजाब दे के बीच कथित सांठगांठ के आरोप लगाए थे। आप और मनप्रीत सिंह अयाली ने इन आरोपों को खारिज किया है।
अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया समेत वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने की तैयारी है। वारिस पंजाब दे की ओर से भी वरिष्ठ नेतृत्व के मंच पर मौजूद रहने की बात कही जा रही है। दोनों दलों ने कार्यकर्ताओं को जुटाने के लिए बैठकों का दौर तेज कर दिया है। वहीं, मेले में भाजपा की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बनी हुई है।