पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के माहिरों को सर्वेक्षण में पता चला है कि धान और बासमती के कुछ खेतों में टिड्डियों का हमला हुआ है।
माहिरों ने सलाह दी है कि पीएयू की सिफारिशों के अनुसार इस हमले को रोकने के लिए फसलों पर दवा का छिड़काव किया जाए।
पंजाब में सफेद पीठ और भूरी पीठ वाला टिड्डा धान की फसल का नुकसान करता है। यह टिड्डे पौधे के तने के पास ही रस चूसते हैं और अक्सर दिखाई नहीं देते। इनके हमले से पौधे के पत्ते ऊपरी तरफ से पीले पड़ने शुरू हो जाते हैं और धीरे धीरे सारा पौधा सूख जाता है।
कई बार हमले में पत्तों पर काली उली भी लग जाती है। जब हमले वाला पौधा सूख के टूट जाता है तो टिड्डे नए पौधों पर चले जाते हैं। यदि इनकी रोकथाम न की जाए तो कई बार धीरे धीरे सारा खेत चपेट में आ जाता है। इसकी रोकथाम के लिए रोजाना खेत का सर्वेक्षण करना जरूरी है। यदि प्रति पौधा पांच से अधिक टिड्डे दिखाई दें तो सिफारिश की दवा का छिड़काव किया जाए।