फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अकाली दल पुनर्सुरजीत में दरार: मनप्रीत अयाली ने सभी पद छोड़े, छह वजहों में खोला असंतोष का पिटारा

Wed, 20 May 2026 11:51 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

मनप्रीत अयाली ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में वे दिल्ली से संचालित राजनीतिक दलों में शामिल होने की नहीं सोच सकते।
विज्ञापन
मनप्रीत अयाली - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब की पंथक राजनीति में बुधवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल पुनर्सुरजीत के वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। 

विज्ञापन


सोशल मीडिया पर वीडियो और विस्तृत संदेश जारी करते हुए अयाली ने पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया, पुरानी लीडरशिप की भूमिका और पंथक एकजुटता के मुद्दों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की।

हालांकि अयाली ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर साफ संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में वे दिल्ली से संचालित राजनीतिक दलों में शामिल होने की नहीं सोच सकते। उन्होंने भाजपा, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बादल गुट का नाम लेते हुए कहा कि उनका अगला कदम पंथ और सिख बुद्धिजीवियों की भावनाओं के अनुरूप होगा।
विज्ञापन


अयाली ने अपने इस्तीफे के पीछे छह प्रमुख कारण गिनाते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के हुकमनामे के बाद उन्हें पार्टी सदस्यता अभियान और पुनर्गठन की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी पद या निजी लाभ की इच्छा के पूरी निष्ठा से की गई, लेकिन बाद में हालात बदल गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिस नेतृत्व को अकाल तख्त की ओर से राजनीतिक नेतृत्व का नैतिक अधिकार खोने की बात कही गई थी, वही नेतृत्व पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। इसके कारण पार्टी के पुनर्गठन की पूरी कवायद प्रभावित हुई और संगत, कार्यकर्ताओं व कुछ नेताओं ने भी दूरी बनानी शुरू कर दी।

अयाली ने कहा कि उन्होंने लगातार सुझाव दिया कि पुरानी लीडरशिप कुछ समय के लिए पीछे हटे ताकि नए ढांचे को स्वीकार्यता मिल सके, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों में लिए गए फैसलों और बाद में सामने आने वाली खबरों में अंतर दिखा, जिससे असंतोष बढ़ा।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पंथक ताकतों को एक मंच पर लाने के लिए वारिस पंजाब दे सहित अन्य संगठनों के साथ तालमेल बनाने की कोशिश हुई, लेकिन वहां भी पुरानी लीडरशिप की भूमिका को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अयाली का इस्तीफा केवल संगठनात्मक फैसला नहीं बल्कि पंजाब की पंथक राजनीति के भविष्य को लेकर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब अकाली राजनीति पहले से नेतृत्व संकट और जनाधार की चुनौती का सामना कर रही है।

अयाली ने अंत में कहा कि उनका किसी व्यक्ति से निजी मतभेद नहीं है, बल्कि वे केवल पंथ की भावनाओं के अनुरूप निर्णय चाहते थे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जो भी फैसला होगा, वह पंथ और पंजाब के हित में होगा।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें