मानसा। सरदूलगढ़ तहसील के करीब साठ गांवों के लोग इस गर्मी में पीने के पानी के लिए तरस गए हैं। इन गांवों को जिन तीन दर्जन जलघरों से पानी की सप्लाई होती है वह भाखड़ा मेन ब्रांच नहर में पानी न आने के कारण सूख चुके हैं, जबकि यहां का भूमिगत पानी जहरीला है। इस नहर में दस अप्रैल से ही पानी नहीं छोड़ा जा रहा। नंगल डेम से 29 अप्रैल तक ही इसमें पानी छोड़े जाने की उम्मीद है। दरअसल, नहर में लाशें बहकर आने की सूचनाओं के बाद अदालत के आदेश पर खनौरी हैड वर्क्स पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम चल रहा है। इसी वजह से नंगल डैम से नहर में पानी रोक दिया गया है। काम पूरा होने के बाद 29 अप्रैल तक पानी आने की उम्मीद है।
जो गांव जल संकट का सामना कर रहे हैं उनमें जटाणा खुर्द, फत्ता मालोका, मोफर, फतेहपुर, कुसला, चुहड़िया, घदुवाला, मीरपुर कला, चौटियां, सरदूलगढ़, मानखेड़ा, झंडा कला के जलघरों से सप्लाई होती है। इनमें से ज्यादातर सूख गए हैं और बाकी सूखने की कगार पर हैं। दस अप्रैल से बंद नहर में खड़ा पानी भी काला पड़ गया है और बदबू आने लगी है।
मीरपुर गांव के गुरतेज सिंह ने बताया कि इलाके के 20 गांवों का पानी घग्घर नदी के प्रदूषण से पीने योग्य नहीं रह गया है और करीब 30 गांव सेम की चपेट में हैं। इससे यहां का भूमिगत जल कड़वा और बीमारियां देने वाला है। कुछ गांवों में सरकार की ओर से आरओ लगवाए गए हैं, मगर यह सुविधा पर्याप्त नहीं है। लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। जटाणा गांव के अवतार सिंह ने बताया कि नहर में पानी न आने के कारण सभी बेहाल हैं। इसके चलते पशुओं के लिए चारे की बिजाई भी पिछड़ गई है।