लुधियाना। उद्यमियों ने माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (मंत्रालय) का बजट बढ़ाने की वकालत की है। तर्क है कि कम बजट के कारण उद्योग के लिए बनी स्कीमें नहीं चल पा रही हैं। फेडरेशन ऑफ स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (फासी) ने वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि मंत्रालय का बजट कम से कम पंद्रह हजार करोड़ रुपये किया जाए। इसके अलावा भारत चीन के बीच आयात निर्यात में संतुलन बनाने और सब्सिडी कम करके इससे बचा निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर करने की भी मांग की गई है।
फासी के राष्ट्रीय प्रधान बदीश जिंदल कहते हैं कि एमएसएमई मंत्रालय का बजट 3530 करोड़ रुपये है। जबकि इस क्षेत्र के उद्योगों का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 40 फीसदी और निर्यात में 45 फीसदी हिस्सा है, यह क्षेत्र छह करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार दे रहा है। देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होने के बावजूद मंत्रालय का बजट तमाम मंत्रालयों के मुकाबले सबसे कम है। टेक्सटाइल मंत्रालय का बजट भी नौ हजार करोड़ रुपये का है। जिंदल ने कहा कि बजट की किल्लत के कारण कैपेसिटी बिल्डिंग स्कीम बंद हो गई। लीन मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम भी नहीं चल पा रही है। ऐसे में छोटे उद्योगों का स्कीमों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा जिंदल ने कहा कि भारत से चीन को निर्यात 85 हजार करोड़ रुपये का है, जबकि आयात 2.77 लाख करोड़ रुपये का है। यानी देश के कुल निर्यात का चीन को सिर्फ छह फीसदी, जबकि कुल आयात का 12 फीसदी चीन से मंगवाया जा रहा है। इन आंकड़ों से साफ है कि देश का मैन्यूफैक्चरिंग बेस कमजोर हो रहा है। बजट में भारत और चीन के बीच आयात निर्यात में संतुलन बनाना अनिवार्य है, तभी देश के घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
जिंदल ने कहा कि देश में विभिन्न क्षेत्रों को 1.92 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही हैं। इनमें से 70 हजार करोड़ की फूड सब्सिडी, 45 हजार करोड़ की ऑयल सब्सिडी और 70 हजार करोड़ की खाद सब्सिडी प्रमुख हैं। इन सब्सिडी को खत्म करके इनसे आए रुपये को इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश किया जाए। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।