मुक्तसर। पंजाबियों की ‘मां’ खेल कबड्डी का रंग अब विदेशियों पर भी चढ़ने लगा है। इसे कबड्डी कप की दीवानगी कहें या इसके लिए जुनून, लेकिन अब विदेशी भी कबड्डी खेल को प्यार करने लगे हैं। इसकी जीती-जागती मिसाल कबड्डी कप के दौरान देखने को मिल रही है, जिसमें विदेशी गोरे और गोरियां मैदान में कबड्डी-कबड्डी के जौहर दिखा रहे हैं।
कबड्डी के प्रति विदेशी लोगों में पैदा हो रही दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार के विश्व कप कबड्डी में करीब आठ कबड्डी की टीमें पूरी तरह से विदेशी हैं। हालांकि पहले हुए दो विश्व कप कबड्डी के मैचों के दौरान टीमें सिर्फ नाम की ही विदेशी होती थीं। उनमें शामिल बहुतात खिलाड़ी एनआरआई पंजाबी होते थे, मगर इस बार ऐसा नहीं है। इन टीमों में न तो बाहरी देश से कोई खिलाड़ी है और न ही कोई पंजाबी एनआरआई खिलाड़ी। इन टीमों में शामिल सभी खिलाड़ी संबंधित देश से ही पूरी तरह विदेशी हैं।
इस बार विश्व कप कबड्डी में शामिल स्कॉटलैंड, ईरान, कीनिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, सियरा लियान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, डेनमार्क आदि टीमें पूरी तरह से विदेशी हैं। इनमें किसी बाहरी देश या कोई पंजाबी कबड्डी खिलाड़ी शामिल नहीं है। बुधवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के गृहजिला मुक्तसर के गांव दोदा में आयोजित कबड्डी मैचों के दौरान डेनमार्क के गोरों ने जहां कबड्डी में धमाल मचाई, वहीं डेनमार्क की महिला टीम में शामिल गोरियों को कबड्डी खेलते देख दूर-दराज से पहुंचे खेल प्रेमी भी नाच उठे। इस कबड्डी कप में कनाडा-डेनमार्क की महिला टीम पहली बार कबड्डी में भिड़ीं। डेनमार्क की गोरियों ने कनाडा की गोरियों को जहां धूल चटाई वहीं डेनमार्क के गोरों ने अफगानिस्तान की टीम को पछाड़ा।