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घर में अकेला चिराग रह गया संदीप

Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
Ludhiana
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मुक्तसर। होनी को कोई नहीं टाल सकता। होनी और अनहोनी सब कुदरत के हाथ में है। कुदरत के आगे किसी का जोर नहीं चलता। इसकी जीती-जागती मिसाल अमृतसर निवासी लखविंदर सिंह के परिवार की मौत के रूप में सबके सामने है। इस हादसे के बाद अब परिवार में सिर्फ एकमात्र वारिस संदीप ही बचा है। एक हादसे ने संदीप का पूरा परिवार छीन लिया।
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लखविंदर सिंह के 29 वर्षीय पुत्र दीपक की कुछ दिन पूर्व ही गुरुहरसहाय (फिरोजपुर) में सगाई हुई थी और कुछ ही दिनों में घर में विवाह की खुशियों के बीच हंसी-खुशी क ी किलकारियां गूंजने वाली थीं। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। लखविंदर के पुत्र दीपक की शादी से पहले ही उसके ससुराल पक्ष से मामा ससुर के बेटे की शादी का न्योता उन्हें मिला और नए रिश्तों में मिठास घोलने के लिए दीपक परिवार समेत फिरोजपुर जा पहुंचा। रविवार की देर शाम दीपक अपने पिता लखविंदर (60), माता रेखा (56) और छोटे भाई गगनदीप (27) के साथ फिरोजपुर से बारातियों के साथ अपनी कार में सवार होकर मुक्तसर को चल पड़ा। मगर मुक्तसर स्थित बूड़ा गुज्जर रोड पर अचानक कार अनियंत्रित हो जाने के चलते रजबाहे में जा गिरी और पूरा परिवार ही मौत की गोद में समा गया। घर पर कोई न होने के चलते अमृतसर ही रुक गया लखविंदर का तीसरा बेटा संदीप इस हादसे के बाद परिवार में इकलौता चिराग और अकेला वारिस रह गया है। जहां दीपक की सगाई के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था वहीं अब परिवार के उजड़ने के बाद मातम छा गया है। उधर, दूसरी तरफ ज्यों ही देर रात चार बारातियों की मौत की खबर मुक्तिसर गेस्ट हाउस पहुंची तो विवाह के जश्न को टालते हुए सादगीपूर्वक ही विवाह संपन्न हुआ। सुबह डोली भी गमगीन माहौल में ही उठी। इस दौरान हर आंख नम नजर आ रही थी।
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