खेत मजदूरों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
मजदूरों का सारा कर्ज समाप्त करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
तीन दिनों से संघर्षरत खेत मजदूरों ने बुधवार को सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पंजाब खेत मजदूर यूनियन के नेतृत्व में मजदूरों ने एलान किया कि जब तक उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जाता तब तक वह न केवल संघर्ष को जारी रखेंगे, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली व जिला कमेटी सदस्य तीर्थ सिंह कोठागुरू ने कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनाव से पहले गुटका साहिब पकड़कर लोगों से वादे किए थे, लेकिन बाद में वह वादों से मुकर गए।
केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कारपोरेट घरानों व पूंजीपति कंपनियों को ही लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि ऐसा करते हुए मजदूरों के हितों की जमकर अनदेखी की जाती है। उन्होंने कहा कि खेती सेक्टर में जरूरत से अधिक हुए मशीनीकरण ने मजदूरों का रोजगार समाप्त कर दिया है। सरकारों की ओर से सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है। इससे मजदूरों के भूखों मरने की नौबत आ चुकी है। कर्ज के बोझ तले दबे मजदूर भी लगातार खुदकुशियां कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि मजदूरों का सारा कर्ज समाप्त किया जाए, जरूरतमंद परिवारों को 10-10 मरले के प्लाट दिए जाएं।
दिहाती मजदूर सभा की ओर से अपनी मांगों के लिए ब्लॉक संगत के गांवों जय सिंह वाला, फूल्लों मिट्ठी, गहरी बुट्टर, संगत व जस्सी बागवाली में प्रांत नेता मिट्ठू सिंह घुद्दा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अर्थी फूंककर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रांत नेता मिट्ठू सिंह घुद्दा ने कहा कि जो पिछली सरकार के समय गरीब मजदूरों को नीले कार्ड पर सस्ती गेहूं मिली थी, उसकी जांच के नाम पर एक साजिश तहत सैकड़ों मजदूरों के कार्ड काट दिए गए, जिससे उनके चूल्हे ठंडे होने की कगार पर पहुंच गए है। उन्होंने बताया कि गरीबों के लिए बिजली के बिल माफ करना, गरीबों पर होते सामाजिक जबर बंद करना, एससी विद्यार्थियों के बंद किए वजीफे चालू करना, कर्ज मुक्ति में किसानों के साथ-साथ मजदूरों को शामिल करना शामिल है।