आगे कुआं, पीछे खाई वाले हालात बने किसानों के सामने
धान में नमी की मात्रा ज्यादा होने से किसानों के छूटने लगे पसीने
शैलर मालिक उठाने को तैयार नहीं, कट लगने पर किसानों का होगा आर्थिक नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। धान में नमी का मात्रा ज्यादा होने से किसानों के माथे पर पसीने छूटने लगे हैं। परेशान किसानों के समक्ष ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ वाले हालात बन गए हैं। धान को सुखाने का भरसक प्रयास करने के बावजूद नमी की मात्रा कम होने का नाम नहीं ले रही है। जबकि शैलर उद्योग से जुडे़ कारोबारी सरकार द्वारा तय मापदंड पर खरा उतरने वाले धान को ही उठा रहे हैं। ऐसे में किसान के समक्ष अब धान के वजन पर कट लगवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। लेकिन इस स्थिती में किसानों का भारी आर्थिक नुकसान होगा जबकि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में धान का झाड कम हासिल हुआ है। किसानों का तर्क है कि इससे उन पर दोहरी मार पडेगी। लिहाजा, सरकार इस मामले में दखल देकर नमी की मात्रा में अतिरिक्त छूट देकर किसानों को राहत दे।
शुक्रवार स्थानीय अनाज मंडी में फसल बेचने आए कई किसान अपने धान को मंडी के फर्श पर बिछाकर सुखाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन धान में नमी की मात्रा कम नहीं हो रही थी। किसान प्यारा सिंह, परमजीत सिंह ने बताया कि उसने सुखा धान काटा है लेकिन यहां आकर जांच की तो धान में चौबीस फीसदी नमी की मात्रा पाई गई। धान को सुखाने की कोशिश के बाद भी नमी का मात्रा बाइस फीसदी रही है। अब यदि उसने धान बेचना है तो धान के वजन पर कट लगाना पडे़गा, जिससे उसका भारी आर्थिक नुकसान होगा। जबकि इस बार धान का झाड कम नसीब हुआ है। दूसरी तरफ धान की खरीद नहीं होने से आढ़ती भी कम परेशान नहीं हैं। आढ़तियों को धान का रखरखाव करना पड रहा है और धान नहीं बिकने के हालात में उनका भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने यूनियन की मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार, धान में नमी की मात्रा को बढ़ाकर 24 फीसदी करे। अगर तुरंत मांग को पूरा नहीं किया गया तो यूनियन राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
फोटो:1 सुनाम की अनाज मंडी में धान को सुखाने में जुटे किसान।