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नशा तस्कर ने खुफिया बातचीत के दौरान किया खुलासा-

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पाकिस्तान से बंद हुआ तो बिकने लगा दिल्ली का चिट्टा
नशा तस्कर से ग्राहक बन हुई बातचीत में खुलासा, हिमाचल में भी फैला है नशे का जाल
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। सूबे में नशे के खिलाफ पंजाब सरकार के अभियान का सच जमीनी स्तर पर जानने का प्रयास किया गया तो पता चला कि सरकार जमीनी स्तर पर नशे पर लगाम लगाने से बहुत दूर है। बठिंडा जिले से संबंधित एक नशा तस्कर से जब अमर उजाला के संवाददाता ने ग्राहक बनकर बात की तो उसने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि सीमा पर सेना की सख्ती के बाद पाकिस्तान से आ रहा चिट्टा पंजाब में मिलना बंद हो गया है। इसलिए वह दिल्ली से नाईजीरियन ग्रुप से चिट्टा लेकर पंजाब में बेच रहा है।

अब दिल्ली से आ रहा चिट्टा
बातचीत में जब नशा तस्कर से बात कर चिट्टे का रेट पूछा तो उसने बताया कि पाकिस्तान का चिट्टा चाहिए तो वो आपको दो हजार रुपये प्रति ग्राम मिलेगा। लेकिन अब सीमा पर सेना की सख्ती के कारण पाकिस्तान का चिट्टा नहीं आ रहा है। नशा तस्कर ने कहा कि इस समय उसके पास दिल्ली का चिट्टा है, जो वह दिल्ली के नाईजीरियन ग्रुप से लेकर आता है। नशा तस्कर ने कहा कि दिल्ली वाला माल तीन हजार रुपये प्रति ग्राम मिलेगा और उस संबंध में उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
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पंजाब में सख्ती के बाद भाग जाते हैं हिमाचल
जब नशा तस्कर से पंजाब सरकार की सख्ती के बारे में बात की गई तो उसने कहा कि कुछ पुलिस वाले हैं, जो उससे प्रति माह वसूली करते हैं। जब पुलिस ने कोई कार्रवाई करनी होती है तो उसे पहले ही उन पुलिस वालों से पता चल जाता है और वह आसानी से पंजाब छोड़कर हिमाचल चला जाता है। नशा तस्कर ने बताया किया कि जब पंजाब में सामान्य माहौल हो जाता है तो वह फिर हिमाचल से पंजाब वापस आ जाता है। नशा तस्कर से जब पूछा कि वह हिमाचल में बिना कामकाज कैसे अपना खर्च उठाता है तो उसने बताया कि हिमाचल के मंडी, शिमला, मनाली, कुल्लू में भी उसके ग्राहक हैं, जो उससे चिट्टा खरीदते हैं। उसने बताया कि हिमाचल में युवा पंजाब की तरह मोलभाव नहीं करते। बातचीत के दौरान जब नशा तस्कर को कुछ संदेह हुआ तो उसने तुरंत फोन काट दिया। जिसके बाद उसने अपना नंबर ही बंद कर लिया।

पांच एकड़ जमीन तक बेच दी चिट्टे के लिए
अब नशेड़ियों को नशा छुड़वाने के लिए चलाई मुहिम के तहत जिले के गांव गंगा निवासी संदीप सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर बताया कि वह 1996 से 2012 तक पहले स्मैक पीता रहा, उसके बाद दो साल उसने नशा छोड़ने के लिए गंगानगर के एक नशा मुक्ति केंद्र में लगाए। जब वह नशा मुक्ति केंद्र से बाहर आया तो उसने दो साल तक उसने किसी भी नशे को हाथ नहीं लगाया। लेकिन डेढ़ वर्ष पहले फिर से कुछ दोस्तों ने उसे चिट्टे की लत लगा दी जिस की पूर्ति के लिए उसने अपनी पांच एकड़ जमीन तक बेच दी और इसी कारण उसका अपनी पत्नी से तलाक भी हो गया था। उसने बताया कि जब वो चिट्टा पीता था तो उसे तस्कर बताते थे कि यह चिट्टा पाकिस्तान का है। लेकिन जैसे ही चिट्टा पाकिस्तान से आना बंद हुआ तो दिल्ली वाला चिट्टा पंजाब में बिकना शुरू हो गया था।
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दिल्ली वाला चिट्टा हड्डियों को पीस कर बनाते हैं
नशा तस्कर दिल्ली वाले चिट्टे के संबंध में संदीप ने खुलासा करते हुए बताया कि दिल्ली में जो चिट्टा बनाया जाता है, वो पशुओं की हड्डियों को पीस कर बनाया जाता है। जिसे नशा तस्कर चिट्टा बताकर चिट्टे के आदी युवाओं को बेचते हैं। उसने बताया कि दिल्ली वाले चिट्टे से ही पंजाब में युवाओं की मौत हो रही है। संदीप ने बताया कि कुछ समय पहले ही उसने नशे को अपनी जिंदगी से त्याग दिया है। अब वह सोशल मीडिया के जरिये नशेड़ी युवाओं से अपील की है कि अगर किसी ने नशा छोड़ना है तो उससे संपर्क किया जाए। जिस के लिए वह कोई भी फीस नहीं लेता।
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