लुधियाना निगम चुनाव में बैकफुट पर नजर आया विपक्ष
शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने बिल्कुल नहीं लगाया जोर
लिप ने खास रणनीति के तहत नहीं अपनाया अक्रामक रुख
बैंस ब्रदर्स के हलकों में एक बार भी नहीं हुआ टकराव
कहीं भी नजर नहीं आई आम आदमी पार्टी
अखिल तलवार
लुधियाना।
नगर निगम चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेसी पूरी तरह मुखर रहे। मतदान के दौरान विपक्ष पूरी तरह बैकफुट पर नजर आया। सिर्फ एक हिंसक घटना को छोड़ कर विपक्षी दलों के तेवर कहीं पर भी आक्रामक नजर नहीं आए।
सत्ता में होने के कारण कांग्रेस मतदान के कई दिन पहले से ही आक्रामक थे। विपक्ष को भी एहसास था कि सत्ताधारियों के आगे उनकी चलने वाली नहीं है। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान लोक इंसाफ पार्टी के वर्करों के तेवरों ने किया। हमेशा से सत्ताधारियों से सीधी टक्कर लेने वाले बैंस ब्रदर्स के तेवर बिल्कुल बदले हुए थे। सिमरजीत सिंह बैंस की आक्रामकता पूरी तरह गायब थी। सभी को आशंका थी कि बैंस ब्रदर्स के विधानसभा हलकों लुधियाना साउथ और आत्म नगर में कांग्रेस और लोक इंसाफ पार्टी के वर्करों के बीच जरूर टकराव होगा। लेकिन शाम तक हालात शांतिपूर्ण रहे। सूत्रों के मुताबिक बैंस ब्रदर्स ने खास रणनीति के तहत मतदान के दौरान टकराव को टाला। क्योंकि उनका फोकस सिर्फ कुछ वार्डों पर ही था। वह नहीं चाहते थे कि टकराव के चलते उन्हें हिरासत में लिया जाए। लोक इंसाफ पार्टी के वर्कर इसी प्रयास में थे कि मतदान खत्म होने तक अपने वार्डों पर पूरा फोकस रखें। इसी लिए उन्होंने टकराव टाला। प्रेम मित्तल की कांग्रेसियों के साथ बहस हुई, लेकिन बात बिगड़ी नहीं। लिप नेताओं ने सिर्फ सत्ताधारियों पर आरोप लगाए, सीधा टकराव बिल्कुल टाला। उधर, अकाली दल और भाजपा ने चुनाव में बिल्कुल भी जोर नहीं लगाया। गठबंधन के प्रत्याशियों ने चुनाव में पैसे भी ज्यादा नहीं खर्च किए। क्योंकि उन्हें पता था कि जीतना मुश्किल है, जीत भी गए तो राह आसान नहीं है। दोनों दलों को पता था कि उनके कैडर वोट तो उन्हें पड़ेंगे ही। इसलिए वे भी आक्रामक नहीं दिखे। विधानसभा चुनाव में प्रमुख विपक्षी पार्टी बनने वाली आम आदमी पार्टी चुनाव के दौरान नजर नहीं आई। आप ने लिप के साथ समझौते के तहत 39 वार्डों में अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। लेकिन कहीं पर उनकी मौजूदगी नजर नहीं आई। उनके गठबंधन सहयोगी लिप वाले अपने वार्डों पर ही लगे रहे।