श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के कथित गायब होने के मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिम्मेदारी लेने के बजाय एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने मामला सिंह साहिबानों के पाले में डाल दिया।
इसी कड़ी में पांच सिंह साहिबानों की आपात बैठक 28 दिसंबर को अकाल तख्त साहिब में बुलाई गई है। एसजीपीसी पंजाब सरकार की ओर से दर्ज एफआईआर और गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलने से बच रही है। इसके बजाय वह धार्मिक आड़ में मामला सिंह साहिबानों के माध्यम से उठाकर जांच को रोकने और एफआईआर को रद्द करवाने का दबाव बना रही है।
इस मामले में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से 10 की अग्रिम जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संवेदनशील प्रकरण को कानून के दायरे में हल करना चाहिए। धार्मिक मंचों का इस्तेमाल जांच को प्रभावित करने के लिए करना संस्थाओं की पारदर्शिता पर आघात है। अब निगाहें 28 दिसंबर की बैठक पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि क्या यह बैठक पंथ और मर्यादा के हित में ठोस निर्णय लेती है या केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का प्रयास है।
राजनीतिक लाभ के लिए अकाल तख्त को चुनौती स्वीकार नहीं: एसजीपीसी
श्री अकाल तख्त साहिब ने स्पष्ट किया है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामले में राजनीतिक लाभ के लिए तख्त को चुनौती देना सिख पंथ कभी स्वीकार नहीं करेगा। यह बात एसजीपीसी के सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता, एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका, सुरजीत सिंह भिट्टेवाड़ और अमरजीत सिंह भलाईपुर ने कही।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच श्री अकाल तख्त की जांच कमेटी द्वारा कराई गई थी और एडवोकेट ईशर सिंह की रिपोर्ट में इसे मनी लॉन्ड्रिंग और कर्मचारियों की लापरवाही तक सीमित बताया गया। सियालका ने कहा कि इसे बेअदबी का मामला बताकर संगत को गुमराह करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की ओर से एफआईआर दर्ज करने की मांग तख्त की स्वतंत्रता को चुनौती है।
आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के लापता होने के बहुचर्चित मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सिख संगठनों का रोष बढ़ता जा रहा है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी, सिख यूथ फेडरेशन, सिख सद्भावना दल सहित विभिन्न सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। पुलिस कमिश्नर की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन डीसीपी एवं एसआईटी सदस्य रविंदर सिंह संधू को सौंपा गया।
सत्कार कमेटी के प्रधान सुखजीत सिंह खोसे ने कहा कि 328 पावन स्वरूप लापता हुए थे। इस गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सिख कौम को करीब पांच वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। हाईकोर्ट के आदेशों और बलदेव सिंह वडाला के प्रयासों से जब एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो अब तक दोषियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सिख संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वे चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान निशान सिंह सियालका, सरूप सिंह भुच्चर, कुलदीप सिंह मोदे, रणजीत सिंह गदरजादा, अमरीक सिंह मत्ता, गुरनाम सिंह बोझा सहित बड़ी संख्या में सिख नेता और संगत उपस्थित रही।
प्रशासन पर ढिलाई का आरोप
खोसे ने आरोप लगाया कि सरकार केवल औपचारिकताएं निभा रही है जबकि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने आशंका जताई कि देरी के चलते आरोपी अग्रिम जमानत लेकर कानून की पकड़ से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि एसआईटी इस मामले को लंबित न रखे और शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। सिख नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस तरह बरगाड़ी बेअदबी कांड में दोषियों को बचाने का प्रयास हुआ, उसी तरह शिरोमणि कमेटी 328 पावन स्वरूपों के दोषियों को भी संरक्षण दे रही है। उन्होंने 24 अक्तूबर 2020 का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे पंथक संगठनों और संगतों पर शिरोमणि कमेटी द्वारा लाठीचार्ज किया गया, ककारों और दस्तारों की बेअदबी हुई तथा आंदोलनकारी नेताओं पर ही मामले दर्ज कर दिए गए।
ये हैं प्रमुख मांगें
-सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी।
-आंदोलनकारियों पर दर्ज झूठे मुकदमे रद्द हों।
-संगत पर अत्याचार करने वाले शिरोमणि कमेटी अधिकारियों पर कार्रवाई।
-यह स्पष्ट किया जाए कि पावन स्वरूप किसके आदेश पर, किसे दिए गए और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है।