बैंकों का विलय करने के विरोध में की गई नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर लाखों बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने बैंकों का विलय करने के विरोध में भारत नगर चौक स्थित केनरा बैंक के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के कन्वीनर नरेश गौड़, ज्वाइंट ट्रेड काउंसिल के महासचिव डीपी मोड, जेपी कालडा, अशोक अरोड़ा, जेएस मांगट, गुरमीत सिंह, इकबाल सिंह, केके खुल्लर ने बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों को संबोधित किया।
यूनियन ने कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में बैंकिंग घनत्व अपेक्षाकृत कम है। सभी वर्गों को शामिल करने के लिए देश को बैंकिंग के विस्तार की आवश्यकता है। ऐसे हजारों गांव हैं जहां बैंक नहीं पहुंचे हैं। 323 मिलियन आबादी वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में बैंकों की संख्या 1.35 बिलियन की आबादी वाले देश में बैंकों की तुलना में कहीं अधिक है। भारत में बैंकिंग सेवाएं आवश्यकता से अधिक नहीं हैं चूंकि बैंकिंग सभी लोगों तक नहीं पहुँच पाई है। इस वजह से सरकार ने जन धन योजना शुरू की। अब उन्होंने जनधन योजना आईआई शुरू की है। इसका अर्थ है कि वह अब तक सभी वर्गों तक नहीं पहुंचें हैं। विलय के परिणामस्वरूप बैंकिंग का संकुचन होगा। इसलिए विलय की कोई आवशयकता नहीं है । सरकार का तर्क है कि विलय से बैंक सुदृढ़ हो जाएंगे । इस निष्कर्ष का कोई प्रमाण नहीं है। बैंकों के विलय से बैंक स्वत: ही बडे़ नहीं होंगे। बैंकों का विलय और इन विलय से उत्पन्न होने वाले मुद्दे खराब ऋणों के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देंगे। इससे बैंक और पीड़ित होंगे। विलय और शाखा विस्तार एक दूसरे के विपरीत हैं। विलय के परिणामस्वरूप अतिरिक्त कर्मचारी भी होंगे। यह हमारी आजीविका सुरक्षा को प्रभावित करेगा। बैंकिंग विस्तार के परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अधिक रोजगार होंगे।