शिक्षकों का गुस्सा देख उल्टे पांव लौटे सचिव
अध्यापकों ने पुलिस पर धक्कामुक्की का आरोप लगाया
करीब 50 अध्यापकों को थाने ले जाने के बाद छोड़ा
अमर उजाला ब्यूोर
मानसा। अध्यापक संघर्ष कमेटी पंजाब के आह्वान पर सोमवार को जिले के अध्यापकों ने शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार के बोहा दौरे का विरोध किया। अध्यापकों का आरोप है कि सचिव के खिलाफ नारेबाजी के दौरान पुलिस ने उनसे धक्कामुक्की की। भारी पुलिस फोर्स के पहरे के बावजूद वह जल्दी में एक दर्जन के करीब स्कूलों में रखे प्रोग्रामों को छोड़कर चंडीगढ़ लौट गए। पुलिस करीब 50 अध्यापकों को हिरासत में लेक झुनीर थाने ले गई, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
अध्यापकों ने शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार के सारे प्रोजेक्टों का बायकाट करने और पंजाब के किसी भी स्कूल में उनको ना घुसने देने के आह्वान के बाद उनकी फेरी को पूरी तरह गुप्त रखा हुआ था। अध्यापकों के रोष को देखते जहां पहले बनाई गई सारे शिक्षकोें की बैठकें रद कर दी गई और किसी भी आम अध्यापक को स्कूल में घुसने नहीं दिया गया। केवल कृष्ण कुमार के प्रोजेक्टों में काम करती लाडली फौजों को बुलाया गया था, शिक्षा अधिकारियों ने बार-बार प्रोग्राम रद्द होने व कभी शिक्षा सचिव के न आने का प्रचार किया गया। इसके बावजूद अध्यापक उनके विरुद्ध रोष प्रदर्शन करने और शीघ्र वापस भेजने में सफल रहे।
अध्यापक संघर्ष कमेटी के नेताओं कर्मजीत तामकोट, राजविंद्र मीर, इंद्रजीत डेलुआना, गुरदास सिंह, अमोलक डेलुआना, हरदीप सिद्धू, खुशविंद्र बराड़, राजेश बुढलाडा, सुखचैन गुरने, गुरतेज ऊभ्भा, नितिन सोढ़ी ने कहा कि सरकार मसलों को हल करने की जगह लाठीचार्ज करके भारी जुल्म ढा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कैटेगिरी अधीन अध्यापक 10-10 साल से 2500 से 5 हजार पर काम कर रहे हैं, उनको रेगुलर करने की जगह उनसेअधिक काम लिया जा रहा है, इसी तरह शिक्षा प्रोवाइडर बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं, 5178 को 5 साल होने के बावजूद रेगुलर नहीं किया गया, एसएसए रमसा अध्यापकों की तनख्वाहें 42 हजार से घटाकर 15 हजार रुपये कर दी, स्कूलों के ली सारी ग्रांट बंद कर दी गई, किताबें लेट आती हैं, वर्दी इस बार आई ही नहीं, सारे वजीफे बंद कर दिए गए।