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16 बेसहारा के खर्च को लेकर मनुक्खी सेवा सोसायटी प्रधान और उप प्रधान में विवाद

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खर्च को लेकर मनुखी सेवा सोसाइटी प्रधान-उप प्रधान में विवाद
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हलवारा में शुक्रवार रात को प्रधान ने 16 बेसहारा लोगों को बाहर निकाला
गोदाम में शिफ्ट किए बेसहारा, एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
हलवारा। बेसहारा 16 लोगों की संभाल कर रही मनुखी सेवा उत्तम सेवा सोसाइटी प्रधान ब्रह्मदीप सिंह और उप प्रधान रंदिर सिंह लाडी में चल रहा विवाद शुक्रवार रात गहरा गया। इसके बाद सोसाइटी प्रधान ने भाई घनैया सेवा संभाल केंद्र से 16 बेसहारा लोगों को देर रात को बाहर निकाल दिया गया। विवाद इन लोगों पर आ रहे खर्च को लेकर शुरू हुआ। देर रात उप प्रधान नरिंदर सिंह ने सभी को एक गोदाम में शिफ्ट किया। वहीं मामले में शनिवार रात डीसी प्रदीप अग्रवाल ने एसडीएम रायकोट हिमांशु गुप्ता की ड्यूटी लगाई। इसके बाद रात ही को पूरे स्टाफ को बुलाकर मामले की रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। एसडीएम के मुताबिक सभी 16 लोगों की सेहत संभाल उनकी पहली प्राथमिकता है।
इस सोसाइटी में कुछ दिन पहले संत सीचेवाल आए थे और उन्होंने सोसाइटी के कार्यों की प्रशंसा की थी। डीसी प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि यह मामला गंभीर है। एसडीएम को इस मामले की जांच करने के निर्देश दे रहे हैं। मामले में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई जरूर होगी।
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गौर हो कि मनुखी सेवा उत्तम सेवा सोसाइटी को 10 अगस्त 2018 को रजिस्टर किया गया था। ब्रह्मदीप सिंह की जमीन पर भाई घनैया सेवा संभाल केंद्र तैयार किया गया। सोसाइटी की तरफ से पौधे लगाने, अपने स्तर पर सड़कों की मरम्मत करने और कैंसर पीड़ितों को व्हीट ग्रास का जूस पिलाने का काम शुरू किया गया। सोसायटी में ब्रह्मदीप सिंह को प्रधान, नरिंदर सिंह को उप प्रधान, बलवीर कौर उप प्रधान, महासचिव सुखजिंदर सिंह और खजांची इंद्रजीत सहित 11 लोगों को चुना गया था।
--कोट--
उप प्रधान नरिंदर सिंह अपना दबदबा कायम करना चाह रहा था। इसलिए सात सदस्यों ने प्रस्ताव पारित कर उसे पद से हटा दिया है। नरिंदर सिंह खुद बेसहारा लोगों को अपने साथ लेकर गया है, अगर उन्हें कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेदारी नरिंदर सिंह की होगी। मैं डीसी को लिखित शिकायत भी दूंगा। अगर पब्लिक का सहयोग मिला, तो बेसहारा लोगों को जरूर रखा जाएगा।
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ब्रह्मदीप सिंह, प्रधान
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बेसहारा लोगों पर आ रहे खर्च को लेकर मतभेद पैदा हुए थे। इसलिए प्रधान ब्रह्मदीप सिंह बेसहारा लोगों को वहां से हटाने के लिए कह रहे थे। मैंने दो महीने का समय देने की मांग रखी थी लेकिन शुक्रवार रात को उन्होंने तुरंत जगह खाली करने का फरमान सुना दिया था। इसलिए मजबूरी में बेसहारा लोगों को गोदाम में शिफ्ट करना पड़ा।
- नरिंदर सिंह, उप प्रधान
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