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विज्ञान को सार्वजनिक भलाई के इस्तेमाल पर दिया जोर

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विज्ञान को सार्वजनिक भलाई के इस्तेमाल पर दिया जोर
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पीएयू में तीन दिवसीय 21वीं पंजाब कांग्रेस शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पंजाब अकादमी आफ साइंसेज के नेतृत्व में 21वीं पंजाब साइंस कांग्रेस बुधवार को शुरू हुई। विकास और वातावरण सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक खोजों के उद्देश्य से यह 7 से 9 फरवरी तक चलेगी। इस तीन दिवसीय साइंस कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में नीति आयोग नई दिल्ली के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि जीवन के स्तर को ऊंचा उठाने में विज्ञान अहम भूमिका निभाता है। समूचे विकास और वातावरण सुरक्षा से हमें समाज में समानता बनाए रखने में मदद मिलेगी। कम लागत में अधिक लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा उत्पादन पैदा करने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि कुदरती स्त्रोतों का हो रहा दुरुपयोग एक गंभीर चुनौती है। इसका मुकाबला सिर्फ वैज्ञानिक खोज से ही संभव है। पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने कहा कि खेती खोज में लैंड मार्क किस्मों के उत्पादन में पीएयू कई संस्थाओं से आगे है। उन्होंने यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल कर उच्च कोटी की संस्थाओं में अहम पद पर तैनात पूर्व विद्यार्थियों व नौजवान वैज्ञानिकों को उत्साहित करने में पंजाब अकादमी आफ साइंसेज की प्रशंसा की।
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पंजाब अकादमी आफ साइंसेज के प्रधान डॉ. आईजेएस बांसल ने 21वीं पंजाब साइंस कांग्रेस के उद्देश्य समूचे विकास और वातावरण सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक खोज पर प्रकाश डाला। इस दौरान जीवन भर की प्राप्तियों के लिए अवॉर्ड बायो टेक्नालाजी प्लांट के पूर्व प्रोफेसर प्लांट डॉ. दर्शन सिंह बराड़ को दिया गया। पांच आनरेरी फेलोशिप अवॉर्ड डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. हरिंदर सिंह बेदी, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. संजीव पुरी और डॉ. यादविंदर सिंह को प्रदान किया गया। इस तरह इंजीनियर गुरचरन सिंह ओरेशन अवॉर्ड डॉ. शलिंदर कुमार जैन को और देश भगत लाल सिंह ओरेशन अवॉर्ड डॉ. पुनीत को प्रदान किया गया। इस दौरान इंडियन सोसाइटी आफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रिडिंग की ओर से विभिन्न फसलों की लैंड मार्क किस्में विकसित करने वाले खेती वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें गेहूं की किस्मों के लिए पद्म भूषण डॉ. खेम सिंह गिल और डॉ. जीएस नंदा, परल बाजरे की किस्मों के लिए डॉ. खेम सिंह गिल, धान की किस्म के लिए डॉ. गुरतेज सिंह बराड़, मक्की की किस्म के लिए डा. अमरजीत सिंह खेहरा, डा. वीके सक्सेना. डा. एनएस मल्ली तथा डा. बलदेव सिंह ढिल्लो को दालों की किस्मों के लिए डॉ. एसएस बराड़, तेलबीज की किस्मों के लिए डॉ. एसएस बांगा और डॉ. एमएम गुप्ता, जवी की किस्मों के लिए डॉ. पीडी मंहदीरता और कमाद की किस्मों के लिए डॉ. केएस थिंद को सम्मानित किया गया।
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