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धान बिजाई का काम जोरों पर, प्रवासी मजदूरों की बढी डिमांड

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बडे़ किसानों को तरजीह दे रहे प्रवासी मजदूर
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धान बिजाई का काम जोरों पर, प्रवासी मजदूरों की बढ़ी मांग
भाकियू ने कहा-धान बिजाई का समय तय न करे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। मालवा इलाके में धान की बिजाई ने जोर पकड़ लिया है। बिजाई के लिए प्रवासी मजदूरों की मांग बढ़ गई है। प्रवासी मजदूर बडे़ किसानों के यहां धान लगाने को अधिक तरजीह दे रहे हैं। गांव बख्शीवाला में धान लगाने पहुंचे मजदूर केशव सुधीर ने कहा कि एक स्थान पर ज्यादा काम मिलने के कारण उन्हें बार बार भटकना नहीं पड़ता है। इसके अलावा बडे़ किसान उन्हें ज्यादा सुविधाएं भी देते हैं। इसी कारण उनकी प्राथमिकता बडे़ किसान हैं। किसान खुद रेलवे स्टेशनों पर प्रवासी मजदूरों को ट्रैक्टरों पर बिठाकर खेतों तक ला रहे हैं। प्रति एकड़ 2700 रुपये तक मजदूरी देने के अलावा मजदूरों को रोटी, चावल, चाय और रहने का प्रबंध किया जा रहा है। जबकि पिछले वर्ष 2200 से लेकर 2500 रुपये मजदूरी थी। प्रवासी मजदूरों के एक ग्रुप में 20 से लेकर 30 मजदूर हैं, जो रोजाना पांच से सात एकड़ जमीन पर धान लगाते हैं। इसी गांव के किसान राम सिंह ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को मजदूरी देने के अलावा उन्हें आटा, चावल, चाय और अन्य खाद्य पदार्थों का प्रबंध करना पड़ रहा है।
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धान बिजाई का समय तय न करे सरकार
भाकियू भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से मांग की है कि धान की बिजाई का समय तय न किया जाए। यूनियन के जिला सचिव दरबारा सिंह ने तर्क दिया कि धान बिजाई का समय तय होने से मजदूरों की मांग एकदम बढ जाती है। जिससे मजदूरों को मुंहमांगी मजदूरी देनी पड़ती है।
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फोटो:20एसजीआरपी02: सुनाम के रेलवे स्टेशन से प्रवासी मजदूरों को ट्रेक्टरट्राली पर ले जाते किसान।
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