संगत नहीं रोक पाई श्रद्धा के आंसू, आंखें हुईं नम...
गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप साहिब में नगर कीर्तन से संपन्न हुई शहीदी सभा
लाखों की तदाद में संगत ने भरी हाजरी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब। श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और माता गुजरी जी की अतुल शहादत को समर्पित शहीदी सभा के तीसरे व आखरी दिन गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब तक विशाल नगर कीर्तन निकाला गया। इससे पहले गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में आसा की बार के कीर्तन उपरांत मुख्य ग्रंथी भाई हरपाल सिंह ने माता गुजरी जी और साहिबजादों के जीवन इतिहास पर प्रकाश डाला और जपुजी साहिब के पाठ उपरांत अरदास की गई और संगत को पवित्र हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब के हैड ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह ने सुनाया।
शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने पांच प्यारों और निशानची सिंहों को सिरोपा भेंट किए और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पवित्र स्वरूप जयकारों की गूंज से सुनहरी पालकी साहिबमें सुशोभित किया गया। नगर कीर्तन में अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थियों, गतका अखाड़ों ने जौहर दिखाते साहिबजादों को श्रद्धा और सत्कार भेंट किया। नगर कीर्तन के सभी रास्ते संगत और सभा-सोसायटियों ने जोरदार स्वागत किया गया और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए वस्त्र और पांच प्यारे साहिबान को सिरोपा भेंट किए गए। गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब में नगर कीर्तन की समाप्ति समय सिख पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थों ने गुरबानी कीर्तन के साथ संगत को जोड़ा। पंडाल में बैठी संगत की आंखें नम हो गईं। संगत में मौजूद कई महिला व पुरुश श्रद्धालु श्रद्धा के आंसु नहीं रोक पाए। वहीं ज्ञानी जगतार सिंह ने कीर्तन सोहिला साहिब का पाठ किया और समाप्ति की अरदास ज्ञानी रघबीर सिंह जत्थेदार तख्त श्री केसगढ़ साहबि ने की। नगर कीर्तन दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, दमदमी टकसाल के प्रमुख बाबा हरनाम सिंह खालसा, शिरोमणी बूढ़ा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।
सिख कौम की एकता के लिए एकजुट होना जरूरी-लौंगोवाल
नगर कीर्तन की समाप्ति पर गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप में सजाए गए गुरमति समारोह में एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि माता गुजरी जी और छोटे साहिबजादों की शहादत कौम के लिए मार्ग दर्शन है और सिख कौम का खासकर नजवानों का फर्ज बनता है कि अपने महान शहीदों के जीवन से सीख लेकर सिक्खी स्वरूप सजाएं और अमृत की दात लेकर गुरु वाले बनें। लौंगोवाल ने कहा कि शहीदों की कुर्बानियां हमें धर्म में परिपक्व रहने का रास्ता दिखातीं हैं। सिख कौम को अपने शहादत वाली विरास्त का गर्व है और रहेगा। वर्तमान चुनौतियों से निकलने के लिए राष्ट्रीय एकता और एकजुटता की बड़ी जरूरत है और इस लिए समूह कौम श्री अकाल तख्त साहिब के झंडे नीचे एकत्रित होनी चाहिए।
सिख कौम के नाम संदेश देना पड़ा भारी, हूटिंग
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने समापन समारोह पर सिख कौम के नाम जैसे ही संदेश देने के लिए मंच पर आए तो संगत से एक सिख व्यक्ति ने उनके संदेश में खलल पैदा कर हूटिंग शुरु कर दी और पंडाल से खड़े होकर सतनाम-वाहेगुरु का जाप शुरु कर दिया और वह व्यक्ति संगत को भी संदेश ना सुनने के लिए जाप करने के लिए उक्साने लगा। हर्कत में आई एसजीपीसी की टास्क फोर्स ने तुरंत उस व्यक्ति को पंडाल से बाहर करने लगे तो काफी घमासान मच गया जहां संगत में भगदड़ का माहौल पैदा हो गया। फिर भी उक्त व्यक्ति अपनी बात कहे बिना पंडाल से बाहर नहीं गया। उक्त व्यक्ति ने अपना नाम गुरमुख सिंह और श्री आनंदपुर साहिब का निवासी बताते हुए कहा कि बादलों की जेब से निकले अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अब सिख कौम के नाम संदेश जारी करेंगे। अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पिछले समय दौरान हुईं गुरु साहिब की बेअदबियों के खिलाफ बादलों को क्यों फुर्मान जारी नहीं कर सकते? उल्टा एसजीपीसी की गोलक से 91 लाख रुपए खर्च कर राम रहीम को माफी देने का प्रचार किया था वह जग जाहिर है। पंडाल में यह सब कुछ होता रहा और अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने अपना संदेश जारी रखते कहा कि सिख कौम के नाम संदेश में जहां छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी की अतुल शहादत को श्रद्धा और सत्कार भेंट किया, वहां ही पंथ विरोधी लोगों की चालों से पंथ को चौकन्ना रहने की अपील की। यह भी कहा कि कुछ मुट्ठी भर लोग सिक्ख कौम को श्री अकाल तख्त साहिब की अपेक्षा तोड़ने का यत्न कर रहे हैं और इन लोगों का उद्देश्य केवल पंथ को कमजोर करना है। ज्ञानी सिंह ने कहा कि सिख कौम हमेशा चुनौतियों में से गुजरती रही है और इतिहास गवाह है कि सिख धर्म को केंद्रीय धुरे की अपेक्षा तोड़ने के लिए कईं शक्तियां आईं सभी को मुंह की खानी पड़ी। नौजवानों और बच्चों अंदर सिखी सरोकार का संचार करन के लिए मां- बाप को आगे आने की अपील की गई।
फोटो कैप्शन:28जीबीजीपी01- शहीदी सभा के अंतिम दिन गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से निकाली गए विशाल नगर कीर्तन में सुंदर पालकी साहिब व संगत हुजूम।
फोटो कैप्शन:28जीबीजीपी02- नगर कीर्तन में शामिल गत्तका पार्टियां जौहर दिखाते हुए।फोटो कैप्शन:28जीबीजीपी03-गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप साहिब में संपन्नता की अरदास के बाद अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के संदेश का विरोध करते हुए गुरमुख सिंह।