किसानों ने बठिंडा-मानसा नेशनल हाईवे किया 6 घंटे जाम
किसान खुदकुशी मामले में परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग
मिनी सचिवालय के पास भी दिया धरना, तहसीलदार से बैठक बेनतीजा
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
गांव सेमा के पटवारखाने में पटवारी के सामने किसान खुदकुशी मामले में पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों की ओर से बुधवार को पीड़ित परिवार के साथ बठिंडा-मानसा नेशनल हाईवे स्थित हाजी रत्न चौक में 6 घंटे जाम लगाया गया। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार सुखबीर सिंह की किसान नेताओं से दो घंटे तक चली बैठक भी बेनतीजा रही।
सबसे पहले किसानों ने बुधवार सुबह मिनी सचिवालय के पास धरना दिया। जब कोई भी प्रशासनिक अधिकारी किसानों की बात सुनने न आया तो गुस्साए किसानों ने बठिंडा-मानसा नेशनल हाईवे पर दोपहर 12 बजे जाम लगा दिया। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार सुखबीर सिंह किसानों के पास पहुंचे। उन्होंने धरना समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन किसान मांगों पर अड़े रहे। किसानों ने शाम छह बजे खुद ही जाम हटा दिया।
किसान नेता शिंगारा सिंह मान ने कहा कि प्रशासन पीड़ित किसान परिवार से धक्कशाही कर आरोपी पटवारी जगजीत सिंह का साथ दे रहा है, लेकिन किसान पीड़ित परिवार को वह इंसाफ दिलाकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रशासन के खिलाफ संघर्ष तीखा किया जाएगा। इसकी जिम्मेवारी जिला प्रशासन की होगी। डीसी दीप्रवा लाकरा ने कहा कि प्रशासन किसानों के साथ बातचीत कर रहा है।
चालकों को भी झेलनी पड़ी परेशानी
किसानों के जाम के दौरान बस चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। क्योंकि जो रूट जिला प्रशासन ने डायवर्ट कर बनाया है, वहां से सिर्फ मोटरसाइकिल और कारें ही आसानी से गुजर सकती हैं। बसों के लिए उक्त रूट डायवर्जन बहुत कम है। इसके चलते किसी समय भी बड़ा हादसा होने की संभावना है। 6 घंटे लगे जाम से बठिंडा-मानसा नेशनल हाईवे पर गुजरने वाले सैकड़ों वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने उक्त जाम को देखते हुए ट्रैफिक रूट सब्जी मंडी और सिविल लाइन से डायवर्ट कर दिया।
‘चार माह बाद भी नहीं मिला मुआवजा’
मृतक किसान जसवंत सिंह के बेटे गुरदीप सिंह ने बताया कि उनकी जमीन लहरा मोहब्बत में थी। इस पर वह अपने पिता के साथ खेती करता था, लेकिन गांव सेमा में उस समय मौजूद पटवारी जगजीत सिंह ने फर्जी तबादला कर किसान की जमीन कहीं और दिखा दी थी। गुरदीप के अनुसार इससे आहत होकर उसके पिता जसवंत सिंह ने इस साल 10 मई को गांव सेमा के पटवारखाने में आरोपी पटवारी के सामने जहर निगल खुदकुशी कर ली थी। उसने आरोप लगाया कि पहले जिला प्रशासन ने उनको बनती मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया था, लेकिन चार माह बाद भी उनके परिवार को मुआवजा नहीं मिला।