दलित छात्रा को परीक्षा में न बैठने देने पर हंगामा
- विधायक बैंस के हस्तक्षेप के बाद छात्रा ने दी परीक्षा
- हंगामे का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
फीस जमा न होने की वजह से एसडीपी कालेज के प्रबंधन की ओर से मंगलवार को एससी वर्ग की एक छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। इसके विरोध में यहां जमकर हंगामा हुआ। आखिरकार मामला विधायक सिमरजीत सिंह बैंस तक जा पहुंचा। विधायक बैंस के मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करने के बाद मामला तब शांत हुआ, जब छात्रा को परीक्षा में बैठने का मौका मिला। हालांकि इस हंगामे के कारण परीक्षा की शुरुआत हुए करीब डेढ़ घंटे का समय बीत चुका था।
वहीं हंगामे का लाइव वीडियो फेसबुक पर वायरल होने के कारण सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा रही। विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा कि वह बुधवार को सुबह एक बार फिर कालेज जाएंगे और विद्यार्थियों समेत प्रबंधकों से बात कर सारा मामला हल करेंगे। विधायक बैंस ने बताया कि एसडीपी कालेज में पढ़ाई कर रही छात्रा ने उन्हें फोन पर कहा कि वह दलित है और उसे सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद (स्कालरशिप) नहीं मिली है। उधर, फीस जमा न करने के कारण कालेज प्रबंधन की ओर से उसे परीक्षा में बैठने से मना कर दिया है। यदि उसे परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला तो वह खुदकुशी कर लेगी। बैंस ने बताया कि जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने छात्रा को आश्वासन दिया कि वह कालेज प्रबंधन से बात कर रहे हैं। बैंस ने कालेज प्रबंधन से फोन पर बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। इसके बाद वह तुरंत कालेज पहुंचे। तब तक परीक्षा शुरू हुए डेढ़ बजे का समय बीत चुका था। पार्षद रणधीर सिंह सिबिया तथा लोक इंसाफ पार्टी के नेता कालेज पहुंचे तो कालेज प्रबंधन से जुड़े लोगों ने आनन फानन में करीब तीन बजे लड़की को पेपर देने के लिए अंदर जाने दिया। विधायक बैंस ने कालेज प्रबंधकों से बात की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ हो रही धक्केशाही को बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने मामले से डायरेक्टर सोशल वेलफेयर जसविंदर कौर को भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी को देने वाली स्कालरशिप लेट आती है, तो वह यकीनी बनाए कि इस संबंध में कालेज प्रबंधन को सूचित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के साथ इस तरह की धक्केशाही न हो सके। वहीं प्रिंसिपल मंजू भसीन ने बताया कि छात्रा की दो साल की 24000 फीस बकाया है। वहीं दो साल से स्कालरशिप भी नहीं आई है। इसलिए छात्रा को रोका गया था।