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नई सियासी तस्वीर उभरने का संकेत दे रही हैं पूर्व वित मंत्री की पत्नी की गतिविधियां

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गगनदीप कौर ने संगरूर व बरनाला में बढ़ाए दौरे
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नई सियासी तस्वीर उभरने का संकेत दे रही हैं पूर्व वित्त मंत्री की पत्नी की गतिविधियां
लौंगोवाल को एसजीपीसी की कमान सौंपकर अकाली दल ने खेला नया दांव
लोकसभा चुनाव पर है पार्टी की नजर
सुशील कुमार।
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)।
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव व पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा की पत्नी गगनदीप कौर ढींडसा की अचानक बढ़ी सियासी सरगरमी ने जिले में नई सियासी तस्वीर उभरने की तरफ इशारा कर रही है। बीबी ढींडसा की बड़ी सरगरमी संकेत दे रही है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में ढींडसा परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में होगा और खुद बीबी ढींडसा भी अकाली दल की ओर से प्रत्याशी हो सकती हैं। इसके अलावा गोबिंद सिंह लौंगोवाल को एसजीपीसी की कमान मिलने को भी अकाली दल की खास रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अकाली दल ने खुद को मजबूत करने के लिए नया दांव खेला है। पार्टी की नजर लोकसभा चुनाव पर है और इसका असर डेढ़ साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में दिखाई दे सकता है।
बीबी गगनदीप कौर ढींडसा पिछले कई सप्ताह से जिला संगरूर व बरनाला में विभिन्न समागमों में शामिल हो रही हैं। इस दौरान बीबी ढींडसा, पार्टी के पुराने व नौजवान वर्करों के साथ मुलाकात कर रही हैं और आने वाले समय के लिए तैयार रहने संबंधी भी दबी जुबान में कहा जा रहा है। बीबी ढींडसा की गतिविधियों को उनके चुनाव मैदान में खडे़ होने की चर्चाओं के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। बुधवार को भी बीबी ढींडसा ने हलका लहरा, धूरी सहित अन्य कई जगों पर आयोजित निजी समागमों में शिरकत की।
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बता दें कि पार्टी के दिग्गज नेता व सेक्रेटरी जनरल और राज्यसभासांसद सुखदेव सिंह ढींडसा के हाथ में दोनों जिलों (संगरूर व बरनाला) की कमान है औरउनके इशारे पर ही पार्टी इस सबंधी निर्णय लेगी। चर्चा है कि सीनियर ढींडसा इस बार खुदचुनाव मैदान में होने की बजाए अपनी पुत्रवधू को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। अकालीदल पहले से ही अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्रीसुरजीत सिंह बरनाला के परिवार से सुलह करना और पूर्व मंत्री बलदेव सिंह मान से संबंधोंके दुरूस्त होने को पार्टी के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
लौंगोवाल के एसजीपीसी का अध्यक्ष बनने से होगा सियासी लाभ सियासीजानकारों का मानना है कि सुनाम हलके से विधानसभा चुनाव लडने वाले गोबिंद सिंह लौंगोवालके एसजीपीसी का अध्यक्ष बनने का सियासी लाभ अकाली दल को आने वाले चुनावों में मिल सकताहै। क्योंकि लौंगोवाल पिछले लंबे समय से सियासत में सरगरम हैं और तीन हलकों (धनौला,धूरी व सुनाम) से विधानसभा चुनाव लड चुके हैं। अहम पहलू यह है कि तीन बार चुनाव जीतनेके अलावा उन्हें ही महरूम संत हरचंद सिंह लौंगोवाल का वारिस माना जाता है। इसी का लाभअकाली दल को आने वाले समय में हो सकता है। पार्टी ने किसी खास रणनीति के तहत उन्हेंएसजीपीसी की कमान सौंपी है और चर्चा है कि इस निर्णय में सीनियर ढींडसा की अहम भूमिकारही होगी।
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बीबी ढींडसा ने अपनी गतिविधियों संबंधी कहा कि ढींडसा परिवारहमेशा दोनों जिलों में सरगरम रहता है। इसे सियासत से जोडकर नहीं देखा जाए। भविष्य मेंयदि पार्टी कोई जिम्मेदारी उन्हें सौंपेगी तो वे पीछे नहीं हटेंगी।
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