फैक्टरी धमाके ने सौ लोगों के सिर से उड़ाई छत
- प्लास्टिक फैक्टरी ब्लास्ट केस : सात मकानों को अनसेफ घोषित कर खाली करवाया
- पांच घरों की दिवारें और छत क्षतिग्रस्त, गली में चारपाई बिछा खुले में कर रहे गुजारा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
सूफिया चौक स्थित गोला प्लास्टिक फैक्टरी में आग लगने और ब्लास्ट के बाद बिल्डिंग गिरने से 13 लोगों की जान चली गई। दो लोग अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। तीन फायर कर्मचारियों के रिश्तेदार तीन दिन से उनकी खबर लेने के लिए मलबे पर बैठे हुए हैं। इन सबके साथ-साथ फैक्टरी के धमाके के ओर भी पीड़ित हैं। फैक्टरी के साथ रहने वाले सौ से ज्यादा लोगों के सिर से धमाके ने छत छीन ली है। धमाके के कारण फैक्टरी के साथ लगते पांच मकानों की तो छतें और दीवार टूट गईं, लेकिन सात मकान ऐसे हैं, जिन्हें बचाव कार्यों में लगी टीमों ने अनसेफ घोषित कर दिया है। इसके बाद इस इलाके के सौ से ज्यादा लोग बिजली-पानी के बिना गली में खुले आसमान के नीचे चारपाई बिछा कर गुजारा करने को मजबूर हैं। इनमें बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं भी शामिल हैं। प्रभावित लोगों को खाने के लिए भी लंगर और रिश्तेदारों का सहारा लेना पड़ रहा है।
इंडस्ट्री एरिया की फैक्टरी में तंग गलियों में काफी लोगों के घर भी है, जोकि आस-पास की फैक्ट्रियों में काम करते हैं। इसके साथ-साथ कुछ छोटी फैक्ट्रियां भी हैं। सोमवार को सुबह गोला प्लास्टिक फैक्टरी में अग्निकांड के बाद हुए धमाके के कारण पांच मंजिला बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढेर हो गई थी।
बुजुर्ग नक्षत्तर सिंह और गुरदेव सिंह ने कहा कि इलाके में उनके चार परिवार रहते हैं। फैक्टरी का एक हिस्सा उनके मकानों पर गिर गया था। जिस दिन फैक्टरी में सुबह आग लगी तो लोगों ने उनसे मकान खाली करने के लिए कहा। वह अपना जरूरी सामान लेकर बाहर गली में आ गए। कुछ समय बाद फैक्टरी में धमाके के बावजूद उनकी जान तो बच गई, लेकिन उनके चारों परिवारों के सिर की छत उड़ गई। विशाल कपूर का कहना है कि धमाके में उनके भाई रोहित घायल हो गया। जोकि सीएमसी अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।
--विकास मल्होत्रा, 22 नवंबर