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दुकाने सस्ती और फुटपाथ महंगे

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दुकानें सस्ती और फुटपाथ महंगे
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दुकान का तीन सौ और रेहड़ी वालों से 16 सौ किराया वसूल रहा है निगम
-नगर निगम ने दी है तीन सौ और नौ सौ रुपये महीने पर दुकानें दी हैं किराए पर
-फड़ी वालों से भी एक हजार रुपये महीना ले रहे है निगम
विकास मल्होत्रा
लुधियाना। राज्य की सबसे बड़ी नगर निगम लुधियाना में लोगों को दुकानें तो तीन सौ रुपये से एक हजार रुपये महीने किराये पर दी गई है, लेकिन नगर निगम आमदनी बढ़ाने के चक्कर में रेहड़ी वालों से 16 सौ रुपये से तीन हजार रुपये महीना वसूल कर रहा है। इतना ही नहीं फुटपाथ और फड़ी लगाने वालों से भी एक हजार रुपये महीना किराया वसूल किया जा रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि शहर में सरकारी जगहों पर सैकड़ों दुकानें बना कर नगर निगम दुकानदारों से तीन सौ रुपये से लेकर नौ सौ रुपये महीना किराया ले रहा है। लेकिन सड़क पर फुटपाथ पर खड़े रेहड़ी फड़ी वालों से 16 सौ से तीन हजार रुपये महीना वसूले जा रहे है। दरअसल, नगर निगम लुधियाना के माली हालात काफी ही खराब चल रहे है, मुलाजिम दो दो महीने अपनी सैलरी का इंतजार करते हैं। विकास कार्य ठप हुए है। ऐसे हालातों में नगर निगम ने आमदनी बढ़ाने के लिए सड़कों और फुटपाथों पर खड़े रेहड़ी वालों से 16 सौ से तीन हजार रुपये महीना वसूलना शुरू कर दिया है। इस को नगर निगम मुलाजिम राजीनामा फीस के नाम पर ले रहा है और रेहड़ी वालों को पर्ची भी दे रहा है। फुटपाथ पर फड़ी लगाने वालों से भी एक हजार रुपये लिए जा रहे है।
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दूसरी तरफ सरकारी जगहों पर पक्की दुकानें बना कर नगर निगम ने तीन सौ से एक हजार रुपये महीना दुकानदारों से किराया ले रहे है। जिनमें आधी दुकानें ऐसी है जिन से सालों का किराया पेंडिंग पड़ा है। नगर निगम की तरफ से माता रानी चौक स्थित जोन ए के इलाके में 270 दुकानें जिन्हें शेड का नाम दिया गया है। उनसे तीन सौ रुपये महीना के करीब किराया लिया जा रहा है। शिंगार सिनेमा स्थित नगर निगम बी जोन के इलाके में 109 दुकानें है। जिनसे सात सौ से एक हजार रुपये महीना किराया लिया जा रहा है। गिल रोड स्थित जोन सी इलाके में 120 दुकानें है। जिनमें से 933 रुपये महीना किराया लिया जा रहा है। इसके साथ ही 250 शेड जिनसे 190 से चार सौ रुपये किराया लिया जा रहा है। इसके साथ ही सराभा नगर जोन डी में 299 दुकानें हैं। जिनसे 325 रुपये महीना किराया लिया जा रहा है। यहां कुछ दुकानें ऐसी भी है जिनका पांच हजार रुपये महीना किराया भी है। अब रेहड़ी फड़ी वालों ने नगर निगम की इस नीति के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। रेहड़ी फड़ी वाले इस मामले में लोक इंसाफ पार्टी के मुख्य विधायक सिमरजीत सिंह बैंस और अन्य सियासी पार्टियों के नेताओं को भी मिल चुके हैं।
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