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चुनाव कमिशन के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने की सुनवाई

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बठिंडा। राजनीतिक सभाओं के दौरान अकाली दल को पंथ की पार्टी कहे जाने को लेकर शिअद विवादों में घिर गया है। पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग को लेकर होशियारपुर निवासी बलवंत सिंह खेड़ा ने भारतीय चुनाव आयोग के पास शिकायत की थी। चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो खेड़ा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। सोमवार को हाईकोर्ट की डबल बैंच ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को आदेश दिए कि खेड़ा की शिकायत पर तीन दिन में कार्रवाई की जाए।
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याचिकाकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा ने हाईकोर्ट में वकील जतिंदरजीत कौर और इशपुनीत कौर के जरिए दायर याचिका में बताया कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने तीन अप्रैल को बठिंडा के गांव कोटशमीर में एक राजनीतिक जनसभा को संबोधन करने के दौरान कहा था कि अकाली दल पंथ की पार्टी है और लोकसभा चुनाव में डेरा प्रेमी संबंधी आदेश अकाल तख्त का माना जाएगा। याचिका में खेड़ा ने बताया कि बादल ने ऐसा बोलकर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया था, जिसको लेकर उन्होंने 26 अप्रैल को भारतीय चुनाव आयोग के पास शिअद की मान्यता रद्द करने को लेकर शिकायत की थी। लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं की । याचिका में खेडा के वकीलों जतिंदरजीत कौर और इशपुनीत सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया गया था। इस याचिका पर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने सुनवाई करते हुए भारतीय चुनाव आयोग को खेड़ा की शिकायत पर तीन दिन में सुनवाई करने के आदेश जारी किए। बलवंत सिंह खेड़ा ने फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें हाईकोर्ट पर भरोसा था और अब उन्हें उम्मीद जाग चुकी है कि अदालती आदेशों के बाद शिअद के खिलाफ चुनाव आयोग उनकी शिकायत पर कार्रवाई करेगा।
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