वह अपने आधार कार्ड से लेकर अन्य दस्तावेज आढ़ती को दे चुके हैं, अब उनके मोबाइल पर ओटीपी नहीं आ रहा है। ऐसे में पता नहीं कब उनका भुगतान होगा। उनकी फसल की कीमत लगभग 7.50 लाख रुपये बनती है। इससे पहले वह आढ़ती के पास फसल देकर आते थे, उन्हें सब काम होने के बाद जे फार्म मिल जाता था। कुछ दिन बाद आढ़ती से पेमेंट लेकर आ जाते थे। लेकिन इस सिस्टम ने पूरा परेशान कर दिया है।
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ऑनलाइन पोर्टल बना परेशानी का सबब
अनाज खरीद पोर्टल अभी तक आढ़तियों और किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। अनाज मंडियों में आढ़ती किसानों की फसलों संबंधी डेटा धड़ाधड़ अपलोड कर रहे हैं लेकिन इसके आगे क्या हो रहा है, इसके बारे में कुछ नहीं पता है। कई मामलों में आढ़तियों के लाइसेंस खरीद एजेंसी को नहीं दिख रहे हैं तो कहीं किसानों संबंधी डाटा अपडेट नहीं हो रहा है।
अभी तक लुधियाना में 1.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक अनाज मंडियों में हो चुकी है। गुरुवार से गेहूं की आवक कुछ ज्यादा बढ़ी है, अभी तक 35 हजार मीट्रिक टन गेहूं की लिफ्टिंग हो चुकी है। इसमें तेजी लाने का काम चल रहा है। ऑनलाइन पोर्टल में काफी दिक्कतों को ठीक कर दिया है। जहां तक किसानों के भुगतान की बात है, काफी किसानों को हो चुका है। इसका पूरा रिकॉर्ड जल्द दिया जाएगा। - सुखविंदर सिंह गिल, डीएफएससी लुधियाना।