अपनी ही सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। शुक्रवार को दोपहर बाद सिद्धू विमान से अमृतसर पहुंचे। उन्होंने एक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया कि वे अपने संसदीय क्षेत्र अमृतसर के विकास के प्रोजेक्टों को नजरअंदाज करने के विरोध में शनिवार से मरण व्रत पर बैठेंगे।
इस दौरान अगर उनकी जान भी चली गई तो वे समझेंगे कि उन्होंने अपने प्राण गुरु के चरणों में त्याग दिए हैं। वे सुबह साढ़े 11 बजे मरणव्रत पर बैठेंगे। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे किस जगह अनशन शुरू करेंगे।
सिद्धू पहले ही ऐलान कर चुके थे कि वे 28 सितंबर को ऐसा धमाका करेंगे जिससे अमृतसर का नाम फिर छा जाएगा और गुरुनगरी को नजरअंदाज करने वालों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। शुक्रवार को सिद्धू के अमृतसर आने की सूचना मिलते ही पत्रकार सिद्धू के घर पहुंच गए। करीब दो बजे पहुंचे और पत्रकारों से नहीं मिले।
करीब एक घंटे बाद उनके निजी सचिव ने आकर सिद्धू की ओर से जारी एक विज्ञप्ति पत्रकारों को बांट दी। विज्ञप्ति एक साधारण कागज पर थी जिस पर सिद्धू के हस्ताक्षर भी नहीं थे। पत्रकारों के आग्रह के बावजूद सिद्धू मीडिया के सामने नहीं आए।
सिद्धू की ओर से दी गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि तीन सप्ताह से वे अमृतसर के विकास के विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उन्हें कुछ भी बोलने से मना किया है, इसलिए वे शिष्टाचार को निभा रहे हैं। एक ओर पार्टी का आदेश है, दूसरी ओर अमृतसर के लिए उनका कर्तव्य, निष्ठा और ड्यूटी है।
उन्होंने कहा- मैं अपना फर्ज निभाना अच्छी तरह जानता हूं। इसलिए मैं शिष्टाचार को मानते हुए किसी के खिलाफ कुछ भी बोले बगैर अमृतसर के विकास के मुद्दों के लिए शनिवार से मरण व्रत शुरू कर रहा हूं।