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साथी पर फायरिंग के बाद वकीलों ने की हड़ताल: हाईकोर्ट ने पूछा-क्या आपके काम बंद करने से गैंगस्टर रुक जाएंगे?

Thu, 21 May 2026 11:07 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव गगनदीप जम्मू पर मोहाली में जानलेवा हमला हुआ था। इसी के विरोध में वकील हड़ताल पर गए जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव गगनदीप जम्मू पर जानलेवा हमले के विरोध में वकीलों के काम निलंबित करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। 

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कोर्ट ने कहा कि न्यायिक कामकाज ठप करना समाधान नहीं है और इससे अपराधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने वकीलों से तीखे सवाल किए कि यदि आप काम से दूर रहेंगे तो क्या गैंगस्टर अपना काम करना बंद कर देंगे? इस मामले में हमने संज्ञान लिया है लेकिन अभी तक आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जब तक आप हड़ताल वापस नहीं लेते, हम आदेश पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। हमने मामले में तय प्रक्रिया से अलग जाकर तुरंत सुनवाई की और अपना कर्तव्य निभाया। क्या आप अपने मुवक्किलों के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं?

मामला बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व के आधार पर अदालत के समक्ष आया था। बार ने गगनदीप जम्मू पर हुए हमले को गंभीर बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी। 
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अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को गगनदीप की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में गगनदीप के आवास के बाहर स्थायी पीसीआर तैनात कर दी गई है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही पुलिस को हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

बार एसोसिएशन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में सचिव परमप्रीत सिंह बाजवा ने मुख्य न्यायाधीश का त्वरित हस्तक्षेप के लिए आभार जताया। बयान में कहा गया कि बार इस मामले को फॉलो करेगा ताकि गगनदीप की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो सके। इसी के विरोध में बार सदस्यों ने पोस्ट-लंच सत्र में कार्य से दूरी बनाई थी। हालांकि, अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद इस कदम को लेकर कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज की गई है।

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संज्ञान लेने के बावजूद हड़ताल, हम हैरान

चीफ जस्टिस शील नागू ने कहा कि अदालत द्वारा चंडीगढ़ पुलिस को गगनदीप जम्मू की सुरक्षा बढ़ाने के पूर्व निर्देश के बावजूद, बार एसोसिएशन द्वारा दोपहर के भोजन के बाद काम से अनुपस्थित रहने के फैसले पर उन्हें आश्चर्य हुआ है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद ने कहा कि काम निलंबित करने का निर्णय बार के सदस्यों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। हालांकि, मुख्य चीफ जस्टिस ने कहा कि वकील हड़ताल का सहारा लेकर अपने पेशे का अपमान कर रहे हैं। ऐसी हड़तालें सबसे आसान रास्ता हैं और वकीलों को विरोध के अन्य तरीके तलाशने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह हड़ताल मेरे लिए एक बड़ा झटका है। जरा उस याचिकाकर्ता की दुर्दशा की कल्पना कीजिए जो 100-200 किलोमीटर दूर से आया होगा।

जम्मू को भी होना पड़ा पेश

हड़ताल से व्यथित मुख्य न्यायाधीश ने एडवोकेट जम्मू को बुलाया और पूछा कि क्या वह यह जानकर चैन से सो पाएंगे कि उनके कारण वकीलों ने काम बंद कर दिया है। जम्मू ने कहा कि काम से निलंबन बार एसोसिएशन का आदेश था।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए न्यायालय से किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है। अगर आप कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते, तो यह आपकी मर्जी है। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे ही मामले में मुझे ब्लैकमेल किया जा रहा है, जहां मेरी जान खतरे में है और मुझसे इस तरह पूछताछ की जा रही है। न्यायालय ने बार एसोसिएशन से काम बंद करने की अपनी मांग वापस लेने पर भी जोर दिया। बार एसोसिएशन ने ऐसा करने पर सहमति जताई।
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