विरोध के कारण नहीं किया गया लागू
अकाली-भाजपा सत्ता में आए तो सरकार ने कुछ फेरबदल करते हुए पंजाब कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट 2013 पारित कर दिया। इसका विरोध हुआ तो सरकार ने कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया और इसे लागू नहीं किया। पंजाब में लंबे समय से आलू की खेती अनुबंध पर हो रही है। पेप्सी कंपनी ने संगरूर और पटियाला के बीच दो प्रोसेसिंग प्लांट लगाए हैं। कंपनी पंजाब के विभिन्न गांवों से आलू लेकर दोनों प्लांटों में प्रोसेस कर प्रोडक्ट तैयार करती है।
यह था एक्ट में
2013 में बने द पंजाब कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट के अनुसार, कृषि आधारित उत्पाद तैयार करने वाली कंपनियां सीधे किसानों से अपने लिए फसल उत्पादन करने का समझौता कर सकती हैं। किसानों की फसल को कंपनियां सीधे खरीद सकती हैं। देश में इकलौता पंजाब ऐसा राज्य हैं, जहां ठेके पर खेती का अलग कानून है, जबकि अन्य राज्यों में एपीएमसी के तहत नियम व शर्तें लागू हैं।
कांट्रैक्ट खेती का मकसद है, फसल उत्पाद के लिए तयशुदा बाजार तैयार करना। इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना भी कांट्रैक्ट खेती का उद्देश्य है। कृषि उत्पाद के कारोबार में लगी कई कारपोरेट कंपनियों ने कांट्रैक्ट खेती के सिस्टम को इस तरह सुविधाजनक बनाने की कोशिश की, जिससे उन्हें अपनी पसंद का कच्चा माल, तय वक्त पर और कम कीमत पर मिल जाए।