आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन पंजाब (सीटू) की ओर से 7 नवंबर को जलियांवाला बाग अमृतसर से आरंभ किया गया आईसीडीएस बचाव जत्था मार्च रविवार को देश भगत यादगार हाल पहुंचा।
यूनियन की प्रधान ऊषा रानी ने मांग की कि आंगनबाड़ी मुलाजिमों को सरकारी मुलाजिम का दर्जा दिया जाए। यही नहीं जब तक पंजाब सरकार के खजाने की हालत ठीक नहीं है तब तक वर्कर को 15 हजार और हेल्पर को 10000 रुपये मानदेय मिले।
अगर, सरकार ने उनकी मांगें न मानी तो आंगनबाड़ी मुलाजिम सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देंगी।
उन्होंने कहा कि मुलाजिम की तरह आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को भी पेंशन व ग्रेजुएटी दी जाए। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 1975 से राज्य में आंगनबाड़ी आरंभ हुई थी।
37 साल बीतने के बाद भी उन्हें वर्कर को महज 5000 रुपये ओर हेल्पर को 2500 रुपये मिल रहे हैं। यही नहीं सरकार की अनदेखी के कारण अभी तक राज्य में चल रहे 28 हजार 656 सेंटर के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है।
सभी सेंटर किराये की बिल्डिंग में चल रहे हैं। हैरानी तो यह है कि इन सेंटर के लिए आज भी अर्बन में 750 रुपये ओर देहात 200 रुपये किराया मिल रहा है।
मौजूदा समय के दौरान कुछ सेंटर धर्मशाला, मंदिरों व किराये की बिल्डिंग में चल रही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 22-10-2000 को राज्य की 57 हजार 313 आंगनवाड़ी कर्मचारियों को अपनी तरफ से भत्ता दिया है।
केंद्र की तरफ से वर्कर केंद्र 3000 रुपये और हेल्पर को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि पंजाब सरकार वर्क को को 2000 रुपये और हेल्पर को 1000 रुपये दे रही है।