कपास की खेती करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए कहर बनी सफेद मक्खी से अब बड़ी आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
इसके लिए किसानों को खेतों में लगी कपास की फसल में येलो कार्ड लगाने होंगे। जालंधर के गांव बादशाहपुर में स्थापित इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) के केंद्रीय आलू खोज सेंटर की ओर से येलो कार्ड की खोज की गई है। यह खेतों में लगी कपास की फसल को सफेद मक्खी से बचाता है।
सीपीआरएस के डायरेक्टर डॉ. जेएस मिंहास ने कहा कि सफेद मक्खी कपास की खेती को बर्बाद कर देती है। बीते साल पंजाब और हरियाणा में हुई कपास की खेती काफी हद तक खराब हो गई थी। इसलिए येलो कार्ड की खोज की गई है। इस तकनीक से सफेद मक्खी को खत्म कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सफेद मक्खी कपास के पौधों का रस चूस कर वायरस फैलाती है, जो काफी खतरनाक होता है। इससे पूरी फसल खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि मक्खियां येलो रंग की ओर आकर्षित होती हैं। उसी तरह सफेद मक्खी भी पीले रंग पर जाकर बैठती हैं। इस तकनीक का पहले लैब में टेस्ट किया गया था। इसलिए कार्ड को गोल्डन येलो रंग का बनाया जाता है। उस पर ग्रीस या गम लगा दी जाती, ताकि सफेद मक्खी इस पर आकर बैठे और चिपक कर मर जाए।
डॉ. मिंहास ने कहा कि अब किसानों को इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए उत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी किसान केंद्रीय आलू खोज सेंटर में आकर येलो कार्ड संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकता है। पंजाब खेतीबाड़ी यूनीवर्सिटी (पीएयू) की तरफ से भी कपास की खेती करने वाले किसानों को येलो कार्ड खेतों में लगाने की सलाह दी जा रही है। डॉ. मिंहास ने कहा कि इस कार्ड का उपयोग आलू की फसल को बचाने के लिए भी किया जाता है।
घर पर ऐसे बनाएं येलो कार्ड
जालंधर के केंद्रीय आलू खोज सेंटर की ओर से तैयार किया गया येलो कार्ड किसान बड़ी आसानी से घर में तैयार कर सकते हैं, जो महज 10-15 रुपये तक पड़ेगा। येलो कार्ड बनाने के लिए सफेद रंग की फाइबर शीट लेनी पड़ेगी। इस एक शीट से करीब 10 येलो कार्ड बनाए जा सकते हैं। सबसे पहले शीट के ऊपर गोल्डन येलो का रंग करना होगा। फिर शीट को 20-40 या 40-60 सेेंटीमीटर के साइज में काटकर उस पर ग्रीस या गम लगानी होगी।
इसके बाद इन कार्ड्स को लकड़ी की स्टिक के साथ बांधकर कपास के खेतों में लगाना होता है। एक एकड़ खेती में कम से कम 20 येलो कार्ड लग जाते हैं। येलो कार्ड बड़ी आसानी से मार्केट में भी उपलब्ध है, मगर उसकी कीमत 50 से 60 रुपये तक है।