एक अप्रैल से अब तक खरीदे गेहूं का भुगतान नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश सरकार की बीस हजार करोड़ रुपये की लिमिट अभी बनी नहीं है। इसके कारण किसानों और आढ़तियों को गेहूं का भुगतान नहीं हुआ है।
फिरोजपुर में एक अप्रैल से 17 अप्रैल तक लगभग 35 हजार 696 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि मंडियों में गेहूं की आवक लगभग 64 हजार 452 मीट्रिक टन है। जितना गेहूं खरीद एजेंसियों ने खरीदा है उनका भुगतान नहीं हुआ है।
जानकारों का कहना है कि किसानों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि प्रदेश सरकार की बीस हजार करोड़ रुपये की लिमिट नहीं बनी है। कई खरीद एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार को बारह हजार करोड़ का गेहूं कम मिला था वह धनराशि भी उक्त लिमिट में से कटनी है। ऐसा हुआ तो प्रदेश सरकार को आठ हजार करोड़ रुपये मिलेंगे और इतनी धनराशि में से किसानों को भुगतान नहीं होगा।
उधर, डीएफसी सिकंदर वीर का कहना है कि एक अप्रैल से अब तक खरीदे गए गेहूं का भुगतान एक-दो दिन में हो जाएगा। अभी प्रदेश सरकार की ओर से पेमेंट नहीं आई है। पेमेंट एक दो-दिन में आ जाएगी। एक सवाल के जवाब में डीएफसी ने कहा कि उनकी खरीद एजेंसी पनग्रेन की लेबर का मामला किसी अदालत में नहीं है। एक ठेकेदार ने कम लेबर पर ठेका लिया था जिस कारण दूसरे ठेकेदार को काम करने नहीं दे रहा है। इनका विवाद सुलझा लिया गया है।
दूसरी तरफ, जिला मंडी अधिकारी मनजीत सिंह ने बताया कि जिले में 64 हजार 452 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में आया है। 35 हजार 696 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। खरीद मंडी में प्रत्येक प्रकार की व्यवस्था की गई है।