फरीदकोट। पिछले कई वर्षों से बंद यहां की सहकारी चीनी मिल की 135 एकड़ जमीन में लगे करीब दो हजार से अधिक वृक्षों को सरकार ने 67 लाख रुपये में बेच दिया है। पिछले तीन माह से वृक्षों की कटाई का काम मिल परिसर में अंदर किया जा रहा था। शनिवार को इस बात की जानकारी मिलते ही विवाद खड़ा हो गया। आम आदमी पार्टी समेत शहर के वातावरण प्रेमियों और सामाजिक संस्थाओं ने इस कार्यवाही पर सख्त एतराज किया। साथ ही इस मामले में संस्थाओं ने संघर्ष शुरू करने का एलान किया और पूरे मामले की शिकायत नेशनल ग्रीन टिब्यूनल व उच्च अधिकारियों को देने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार फरीदकोट की सहकारी चीनी मिल पिछले कई सालों से बंद पड़ी थी। हालांकि इसे दोबारा चलाए जाने को लेकर भी संघर्ष हुआ था लेकिन वर्तमान समय में यहां से मशीनरी तक भी उखाड़ी जा चुकी है। अब मिल में चारों तरफ पेड़ ही पेड़ दिखाई देते थे, उन्हें भी पंजाब सरकार ने बेच दिया है। शनिवार दोपहर सूचना मिलने पर मिल में पहुंचे आम आदमी के विधायक कुलतार सिंह संधवां, सीनियर नेता गुरदित्त सिंह सेखों और जिला प्रधान सुखजीत सिंह ढिलवां ने कहा कि चीनी मिल की 135 एकड़ जमीन के जंगल में कई प्रजाति के पेड़ हैं, जिन्हें काटा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना संकटकाल में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मची हुई है लेकिन यह कैसी सरकार है जोकि प्राकृतिक ऑक्सीजन के बड़े स्त्रोत को तबाह कर रही है। गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि इन वृक्षों का महज 67 लाख में ठेका दिया गया है जबकि यहां पर लगे वृक्षों की कीमत करोड़ों रुपये की है। इस मामले की भी पड़ताल होनी चाहिए। शाम होते ही वातावरण को समर्पित सीर सोसायटी व भाई घन्हैया कैंसर रोको सेवा सोसायटी के पदाधिकारी भी चीनी मिल में पहुंचे, जिन्होंने वृक्षों की कटाई का काम रुकवा दिया और इस मामले में संघर्ष शुरू करने की घोषणा की। भाई घन्हैया सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा ने कहा कि मिल में पिछले तीन महीनों से वृक्ष काटे जा रहे थे लेकिन किसी को कानों कान खबर नहीं हुई।