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Jalandhar News: बारिश और बाढ़ के बाद धान की फसल पर हल्दी रोग का हमला

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-5 से 10 क्विंटल झाड़ कम होने की आशंका से किसानों के चेहरे मुरझाए
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कंवरपाल
हलवारा। बाढ़ और बारिश से हुई भयंकर तबाही के बाद अब पकने को तैयार धान की फसल पर अब हल्दी रोग ने हमला बोल दिया है। हल्दी रोग नामक फंगस का कोई पक्का इलाज भी नहीं है जिसके चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। पटियाला के राजपुरा के आसपास जिलों में बौना रोग ने धान की फसल पूरी तरह बर्बाद कर दी है और अब लुधियाना, बरनाला, मालेरकोटला आदि जिलों में धान की फसल पर हल्दी रोग का हमला हो गया है।
किसान इसका ठीकरा विभाग और कीटनाशक बेचने वाली कंपनियों के सिर फोड़ रहे हैं। फार्मर्स यंग इनोवेटिव्स एसोसिएशन के सदस्य व राजोआणा कलां के पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने बताया कि हल्दी रोग से इस बार धान का झाड़ प्रति एकड़ 30 क्विंटल से कम होकर 20 क्विंटल तक रहने की संभावना है। इससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। हल्दी रोग का असर लुधियाना और आसपास अधिक हुआ है। जगदीप सिंह नत्त ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने धान की फसल बीजने की तारीख 20 जून से घटाकर 5 जून कर दी थी जिसके चलते फसल को नुकसान हो गया है। तेला पड़ जाने के कारण भी झाड़ पर असर पड़ेगा। सितंबर में पड़ रही अधिक गर्मी के कारण भी धान की फसल पर बुरा असर हुआ है।
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जगदीप सिंह नत्त ने कहा कि अगर किसानों ने धान की तरह समय पूर्व गेहूं की फसल बीजी तो उस पर सुंडी रोग का हमला अवश्य होगा। इसलिए किसानों को चाहिए कि 10 नवंबर से पहले गेहूं की फसल न बीजें अथवा सुंडी रोग का नुकसान झेलना पड़ेगा। गेहूं के झाड़ पर भी बहुत असर होगा। उन्होंने बताया कि धान की फसल पर लगे हल्दी रोग का कोई भी इलाज नहीं है लेकिन कॉरपोरेट और कीटनाशक कंपनियों ने किसानों को गुमराह करके करोड़ों रुपये के वारे न्यारे कर लिए। किसानों ने महंगे कीटनाशक डाले लेकिन हल्दी रोग से धान की फसल को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने दावा किया कि हल्दी रोग से धान की फसल में 5 से 10 क्विंटल झाड़ का नुकसान पक्का है।
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अधिक नुकसान से कैसे बचें किसान
लुधियाना के मुख्य खेतीबाड़ी अफसर गुरदीप सिंह ने माना कि इस बार धान की फसल पर हल्दी रोग ने घातक हमला बोला है। इस बार बारिश ज्यादा होने की वजह से समय पर कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया जा सका। जिन किसानों ने छिड़काव किया बारिश के कारण उसका फायदा नहीं हुआ और हल्दी रोग से फसल को नुकसान हो गया। गुरदीप सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि शाम ढलने के बाद धान की कटाई न करें क्योंकि हल्दी रोग फंगस ओस के कारण चिपका रह जाएगा। अगर दिन और दोपहर में फसल काटी जाएगी तो हल्दी रोग का पाउडर नुमा फंगस झड़ जाएगा। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही कंबाइन से फसल की कटाई की जाए। ऐसा करने से झाड़ पर कम असर पड़ेगा। हल्दी रोग से झाड़ को नुकसान तो होगा लेकिन इसका सही अनुमान लगा पाना मुश्किल है।
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