जालंधर। राज्य सरकार की तरफ से शिक्षा को और बेहतर बनाने के सभी दावे खोखले लग रहे हैं। शिक्षा मंत्री का दावा है कि उनके प्रयासों के कारण आज पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर आ गया है। अगर, आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत इससे कोसों दूर है। 1997 में सत्ताधारी पार्टी ने राज्य के 368 स्कूलों को अपग्रेड किया था। इसमें से कई स्कूलों को प्राइमरी से हाई स्कूल व सेकेंडरी स्कूलों का दर्ज दिया गया था, लेकिन हेड मास्टरों की नियुक्ति अभी तक नहीं की गई।
इन स्कूलों में स्टाफ की कमी तो है ही। इसके अलावा किसी भी काम के लिए इन स्कूलों को दूसरे स्कूलों के हेड का सहारा लेना पड़ रहा है। खास तो यह है कि इन खाली पदों के बारे में पंजाब सरकार के अधिकारी भूल चुके हैं। गर्वनमेंट स्कूल हेड मास्टर एसोसिएशन पंजाब के प्रधान ब्रिज मोहन सिंह बेदी ने पुष्टि की है।
उनका कहना है कि इस संबंधी कई बार उच्च अधिकारियों से विचार करते हुए नियुक्तियां करने के लिए कहा गया है लेकिन सरकार इस तरफ गंभीरता नहीं दिखा रही है। इसी लिस्ट के मुताबिक सरकारी हाई स्कूल, झंगड़ भैणी स्कूल का उद्घाटन मौजूदा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किया था।
इस स्कूल में भी आज तक हेड की पोस्ट सैंक्शन नहीं हो सकी है। यह स्कूल पहले प्राइमरी था। ऐसे ही फाजिल्का जिले के सरकारी हाई स्कूल मिड्डा, फिरोजपुर के हाई स्कूल सनेह तथा मानसा जिले के हाई स्कूल मोजियां का है। यह वह स्कूल हैं, जहां हेड का पूरा काम उधारी पर चलाया जा रहा है। मोजियां स्कूल भी पहले प्राइमरी तक था, जिसे सरकार ने हाई स्कूल का दर्जा दिया था। इन स्कूलों को प्रमोट करने के बाद इन स्कूलों में हेड का पद देना पंजाब सरकार भूल चुकी है।
राज्य में 1100 स्कूलों में नहीं है हेड मास्टर
गवर्नमेंट स्कूल हेडमास्टर एसोसिएसन की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1100 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें हेड मास्टर के पद खाली हैं। राज्य में कुल 2300 स्कूल हैं, जिसमें से 900 के करीब ही पद भरे हुए हैं। खाली पदों की लिस्ट में 1997 में अपग्रेड हुए 368 स्कूल भी शामिल हैं।
जानकारी लेने के बाद भर दिए जाएंगे पद : अंजली भावड़ा
शिक्षा विभाग की सचिव अंजली भावड़ा का कहना है कि खाली पदों की जानकारी उनके ध्यान में नहीं है। अब उनके ध्यान में मामला आया है तो वह इस संबंधी शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका से बात करेंगी। इसके बाद सभी पदों को भर दिया जाएगा।