-श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर गए हिंदू श्रद्धालुओं को लौटाने से बढ़ा रोष
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में इस वर्ष भारत, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों से हजारों श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब पहुंचे हैं। इस बार सबसे बड़ा विवाद तब उभरा जब जत्थे के साथ ननकाना साहिब पहुंचे हिंदू श्रद्धालुओं को पाकिस्तानी अधिकारियों ने लौटा दिया। उन्हें कथित रूप से यह कहकर रोका गया कि गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव से जुड़े कार्यक्रम केवल सिख समुदाय के लिए हैं। इनमें हिंदू श्रद्धालुओं की कोई आवश्यकता नहीं। इससे भारत में धार्मिक सौहार्द और तीर्थ यात्रियों की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
जत्थे के साथ गए सूत्रों के अनुसार भारत से रवाना हुए जत्थे में विभिन्न धर्मों, विशेषकर हिंदू संगत भी शामिल थी। उन्हें लौटाने के बाद पंजाब के धार्मिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि गुरु नानक देव जी किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। उनके उपदेश पूरे मानव धर्म के लिए थे। ऐसे में किसी धर्म के लोगों को रोकना स्वयं उनकी शिक्षाओं के खिलाफ है। एसजीपीसी के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने पाकिस्तान की इस नीति की कड़ी निंदा करते हुए इसे हिंदू सिख भाई चारे में तनाव पैदा करने वाला बताया है। ननकाना साहिब में इस बार की व्यवस्था पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि इस बार संगत के लिए सुरक्षा और सुविधाओं को पिछले वर्षों से बेहतर बनाया गया है लेकिन वास्तविक हालात दावों से मेल नहीं खाते।
लंगर स्थलों पर अव्यवस्था
संगत के लिए लंगर तो उपलब्ध है लेकिन शिकायतें यह हैं कि इस बार लंगर वितरण सीमित स्थानों तक ही केंद्रित है औ लंगर स्थलों पर अव्यवस्था, लंबी कतारें और सेवा कर्मियों की कमी देखी गई। रहन-सहन व आवास पाकिस्तान सरकार ने अस्थाई आवास, गुरुद्वारा परिसर व होटल प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी थी। बावजूद इसके, भारतीय संगत ने कमरे कम पड़ने, स्वच्छता की खराब स्थिति और पेयजल की कमी की शिकायत की है।
वाहनों की संख्या कम
गुरुद्वारा जनमस्थान, करतारपुर व अन्य स्थलों के बीच बस व वाहन सेवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं लेकिन कुछ श्रद्धालुओं के अनुसार वाहनों की संख्या कम है और पैसे भी पिछले समय से इस बार बढ़ा कर लिए जा रहे हैं। रक्षा व्यवस्था के नाम पर वाहनों की आवाजाही भी कई बार रोकी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों का रवैया पहले से अधिक सख्त है। कई स्थानों पर संगत की वीडियोग्राफी, पूछताछ और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार भी साथ
श्री अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज भी जत्थे के साथ गए हुए हैं। उनसे उम्मीद है कि वह पाकिस्तान प्रशासन के साथ इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार और हिंदू श्रद्धालुओं की वापसी पर अपना पक्ष मजबूत तरीके से रखेंगे।