इन कंपनियों ने निगम की जगह पर टावर लगाए हुए हैं, मगर उसकी बनती फीस अभी
तक जमा नहीं करवाई है। शहर में 10 टेलीकॉम कंपनियों ने 593 टावर लगाए हैं।
सभी कंपनियों की फीस मिलाकर निगम ने करीब तीन करोड़ रुपये वसूलने हैं। निगम
के साथ टेलीकॉम कंपनियों को पांच साल का अनुबंध है। कंपनियों ने 2013 से
लेकर 2018 तक की फीस जमा करवानी है।
मेयर सुनील ज्योति ने बताया कि निगम
ने टावर की फीस दस हजार रुपये सालाना फीस निश्चित की है। शहर में जिस
कंपनी के जितने टावर लगे हैं, उसे प्रति टावर 10 हजार रुपये सालाना जमा
करवाने होंगे। निगम ने जिन 10 कंपनियों को नोटिस भेजा है उसमें भारती
सेलुलर लिमिटेड, वोडाफोन इनर साउथ लिमिटेड, बीएसएनएल, इंडस टावर, वियोम
नेटवर्क लिमिटेड, टॉवर विजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एससेल टेलीकॉम
लिमिटेड, क्वीपो टेलीकॉम, जीटीएल लिमिटेड और रिलायंस इंफ्रा लिमिटेड शामिल
हैं। इन सभी कंपनियों ने निगम को पांच साल की फीस देनी है।
रिलायंस इंफ्रा
लिमिटेड के जालंधर में 144 टावर लगे हुए हैं और कंपनी को पांच साल की 72
लाख रुपये फीस अदा करनी है। इसके अलावा भारती सेलुलर लिमिटेड ने 97 टेलीकॉम
टावर के 48.50 लाख रुपये जमा करवाने हैं। क्वीपो टेलीकॉम के 67 टावर के 33
लाख 50 हजार रुपये और जीटीएम लिमिटेड के 6 टावर के तीन लाख रुपये बनते
हैं।
इसके अलावा वोडाफोन इनर साउथ लिमिटेड ने 105 टावर के 52.50 लाख
रुपये, बीएसएनएल ने 65 टावर के 32.50 लाख रुपये, इंडस टावर ने 41 टावर के
20.50 लाख रुपये, वियोम नेटवर्क लिमिटेड ने 11 टावर के 5.50 लाख रुपये,
टॉवर विजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 49 टावर के 24.50 लाख रुपये और एससेल
टेलीकॉम लिमिटेड ने आठ टावर के चार लाख रुपये की फीस जमा नहीं करवाई है।
नगर निगम ने सभी कंपनियों को 15 दिन का समय दिया है, अगर कंपनी समय सीमा के
अंतर्गत फीस जमा नहीं करवाती है तो निगम कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करेगा।