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पनसप के फिरोजपुर व अमृतसर के प्रबंधकों समेत 17 अधिकारी निलंबित

Fri, 18 Mar 2016 09:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मोगा
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निलंबित - फोटो : demo
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पंजाब स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन (पनसप) मैनेजमेंट ने फिरोजपुर एवं अमृतसर के दो कार्यकारी जिला प्रबंधकों समेत 17 अधिकारी निलंबित कर दिए हैं। यह निलंबन बीते साल खरीदी गई धान की 1509 किस्म को स्टोर के लिए प्रबंध न करने को लेकर किया गया बताया जा रहा है। अमृतसर के जिला कार्यकारी प्रबंधक संदीप बांसल समेत 9 अधिकारी और फिरोजपुर के जिला कार्यकारी प्रबंधक मनप्रीत सिंह समेत 6 अधिकारी और दो अधिकारी संगरूर के निलंबित किए गए हैं।
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पंजाब पनसप मुलाजिम यूनियन के प्रदेश प्रधान गुरप्रीतम सिंह चीमा ने निलंबित किए गए अधिकारियों और इंस्पेक्टरों की निंदा करते हुए उनकी बहाली की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पनसप एजेंसी से बीते साल 1509 धान की खरीद दबाव से करवाई थी। उन्होंने कहा कि धान की इस किस्म को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और व्यापारियों ने भी मिलों में भंडार करवाने से इंकार कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने बीते सीजन में 1509 धान की किस्म की खरीद संबंधित कोई फैसला नहीं लिया था।उन्होंने बताया कि सरकार ने यह किस्म दबाव के नीचे खरीद करवाकर गोदामों में स्टोर करवा दी। इसके बाद सूबे के खुराक एवं सिविल सप्लाई मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने इस धान को दूसरे जिलों में तबदील करवा दिया। इससे पनसप को भारी वित्तीय नुकसान भी हुआ।
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चीमा ने बताया कि कर्मचारियों को 1509 धान की क्वालिटी की पहचान के बारे में कोई ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि चावल मिलों में व अन्य स्थानों पर निगम की ओर से 1509 धान की किस्म भंडार करने के लिए योग्य प्रबंध नहीं किया गया। उल्टा लिफ्टिंग और अदायगियां बंद होने के बाद चेकों के जरिये अदायगियों का बहाना बनाकर पनसप मैनेजमेंट ने कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा कि 1509 धान की खरीद से कारपोरेशन को हुए नुकसान के लिए पंजाब सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

उन्होंने कारपोरेशन को चेतावनी देते कहा कि यदि निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों को बहाल न किया तो गया वे संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब में फूडग्रेन से संबंधित 5 खरीद एजेंसियां भंडार एवं मिलिंग का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पनसप एजेंसी को सरकार ने आटा दाल स्कीम का काम अलग दिया हुआ है।

साथ ही पनग्रेन एजेंसी के मुकाबले पनसप के पास फील्ड स्टाफ की संख्या चौथा हिस्सा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी से पनसप इंस्पेक्टर 2 से 3 केंद्रों की ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई जिलों में एक जिला मैनेजर को दो-दो जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों की कमी से पनसप इंस्पेक्टरों व अन्य अमले पर काम का बोझ होने के बावजूद कारपोरेशन की तरफ से बुरा व्यवहार किया जा रहा है।
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