प्रदेश कांग्रेस के उपप्रधान व मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि गोदामों की फिजीकल वेरिफिकेशन से भागने का मतलब मुख्यमंत्री ने खुद मान लिया है कि पंजाब में अनाज घोटाला हुआ है।
उन्होंने कहा कि तथ्य झूठ नहीं बोलते, मुख्यमंत्री को विचलित होने के बजाय बताना चाहिए कि अगर पंजाब सरकार ने अनाज घोटाला नहीं किया तो किसानों को गेहूं की पेमेंट मिलने में देरी क्यों हो रही है, बार-बार बैंक सीसी लिमिट पर रोक क्यों लगा रहे हैं। अगर पंजाब सरकार के भंडारण के आंकड़े सही हैं तो उसकी फिजीकल वेरिफिकेशन करवाने में सरकार को क्या एतराज है।
अनाज घोटाले के आरोप कांग्रेस ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार के वित्त विभाग, रिजर्व बैंक व कैग ने लगाए हैं। पंजाब सरकार अगर पिछले सालों में गेहूं खरीद व उसके केन्द्रीय एजेंसियों द्वारा उठान के आंकड़े अखबारों में सार्वजनिक कर सकती है तो उसे धान खरीद के आंकड़े जारी करने में क्या दिक्कत है। किसानों को गेहूं की अदायगी लेट होने के चलते उनको इसका बनता ब्याज किसानों को देना चाहिए।
जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस को अदालत में जाने की सलाह देना साबित करता है कि पंजाब पुलिस कानून के अनुसार काम न कर केवल सत्ताधारी दल की कठपुतली बनकर काम कर रही है इसीलिए उन द्वारा 20 अप्रैल को मोहाली स्थित विजिलेंस विभाग को सौंपी शिकायत पर अभी तक प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की गई। पंजाब पुलिस सत्ताधारी दल के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी धज्जियां उड़ा रहा है।