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नए रेंट एक्ट के विरोध में वकील सड़कों पर

Wed, 13 Nov 2013 11:15 PM IST
अमर उजाला, जालंधर
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केंद्र सरकार की तरफ से 1995 में बनाए गए रेंट एक्ट को पंजाब में 30 नवंबर को लागू किया जा रहा है। अधिसूचना जारी होने के बाद अब 30 के बाद नए किरायेदारों की रजिस्ट्रेशन करवानी जरूरी होगी।
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इसके लिए एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस भी तय की गई है। इस एक्ट के लिए राज्य सरकार की तरफ से बनाए गए रूल के खिलाफ वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने बुधवार को शहर के सबसे व्यस्त चौक में सुबह 11.30 से 1 बजे तक धरना दिया। धरने के दौरान वकीलों ने तहसीलदार हरमिंदर सिंह को ज्ञापन सौंपा। धरने के दौरान लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।

जिला बार एसोसिएशन के प्रधान मनदीप सिंह सचदेवा का कहना है कि राज्य सरकार की तरफ से रेंट एक्ट में लागू किए गए रूल जनता के हित में नहीं हैं। सरकार इन नए रूल की मदद से प्रॉपर्टी के केसों पर भी अपना हक जमाना चाहती है। उनका कहना है कि अभी रेंट एक्ट के पूरे केस जज के पास जाते हैं।
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नए रूल के बाद ये सारे केस एसडीएम की अदालत में विचारे जाएंगे। एसडीएम पूरी तरह से सरकार के दबाव में काम करते हैं और प्रत्येक दिन अदालत भी नहीं लगाते हैं। इससे जहां लोगों के केस लटकेंगे वहीं प्रत्येक केस का फैसला राजनीतिक दबाव में ही होगा।

यही नहीं राज्य में बनाए गए ट्रिब्यूनल भी जनता के हित में नहीं हैं। इन ट्रिब्यूनल में केस की सुनवाई जाने पर पब्लिक के समय और पैसे की बर्बादी होगी। किरायेदार पर 1000 रुपये रजिस्ट्रेशन की फीस भी निर्धारित करना एक बोझ है। इसी के विरोध में बुधवार को वकीलों ने बीएमसी चौक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस कारण शहर में लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए भारी परेशानी सहन करनी पड़ी।

क्या है रेंट एक्ट
स्थानीय निकाय विभाग ने नाजायज कालोनियों से टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स के बाद अब शहरी लोगों पर एक नया टैक्स लागू कर दिया है। इस रेंट एक्ट को 30 नवंबर से लागू किया जा रहा है। 1995 में केंद्र सरकार ने रेंट एक्ट तैयार किया था। राज्य सरकार ने 18 साल के बाद इस कानून में अपने रूल बना इस एक्ट को लागू किया है। इस एक्ट से नगर पालिकाओं और नगर निगमों की आमदन बढ़ेगी।

तहसीलदार करेंगे किरायेनामा रजिस्टर्ड
नए एक्ट में मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा तहसीलदार से रजिस्टर्ड करवाना होगा। तहसीलदार को रजिस्ट्रार और एसडीएम की अथॉरिटी बनाया गया है। जहां विवाद की पहली अपील दायर होगी।

तहसीलदार ने लिया ज्ञापन
शाहकोट में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होने के कारण वकीलों से ज्ञापन लेने के लिए न तो डीसी मौके पर पहुंचे ओर न ही एसडीएम। वीआईपी ड्यूटी पर होने के कारण वकीलों से ज्ञापन लेने के लिए तहसीलदार की ड्यूटी लगाई गई। ज्ञापन लेने के लिए कोई न पहुंचने के कारण हुई देरी से जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ी। करीब एक बजे तहसीलदार ज्ञापन लेने पहुंचे। उसी के बाद ही धरना हटा।
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