पंजाब सरकार एनआरआई को लुभाने और प्रदेश में निवेश के लिए करोड़ों रुपये एनआरआई सम्मेलनों व आवभगत पर खर्च कर रही है।
इसके विपरीत एनआरआई राज्य में आकर जिस अनुभव के गुजरते हैं, उससे करोड़ों-अरबों रुपये के प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद अधूरे ही बंद कर विदेश लौट जाने पर मजबूर हो रहे हैं।
राज्य सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी एनआरआई के लिए प्रदेश में सकारात्मक वातावरण तैयार नहीं हो पा रहा है।
इस साल भी प्रदेश की सरकार ने 10 और 11 जनवरी को एनआरआई सम्मेलन किया और इस पर छह करोड़ रुपये खर्च किए।
सीएम प्रकाश सिंह बादल व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने एनआरआई को लाख लुभावने सपने दिखाए।
पंजाब में एनआरआई के लिए विशेष अदालत, थानों का निर्माण, एनआरआई आयोग, मंत्रालय तक गठित कर खूब वाहवाही लूटी लेकिन उलटा एनआरआई निवेश के स्थान पर अपने प्रोजेक्ट को बंद कर रहे हैं।
तीन साल में प्रोजेक्ट बंद
अमेरिका के रहने वाले करतार सिंह ने बिजवाड़ा होशियारपुर में अपनी करोड़ों रुपये की जमीन पर एजुकेशन इंस्टीट्यूट तैयार किया था। जहां पर बच्चों को कम फीस पर तालीम दिलाने की योजना थी।
पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया लेकिन सरकार की लालफीताशाही और कार्यालयों में धक्के खाकर करतार सिंह ने तीन साल बाद इस प्रोजेक्ट को बंद करके अमेरिका का वापस रुख कर लिया।
करतार सिंह ने जाने से पहले सारा इंफ्रास्ट्रक्चर व तामझाम पंजाब यूनिवर्सिटी को दान कर दिया। अब पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर खंडहर बन गया है।
सरकारी तामझाम से परेशान
यूके के रहने वाले अवतार सिंह कंग व उनके पांच विदेशी साथियों ने ब्यास के निकट एक बीयर की बड़ी फैक्टरी लगाने की योजना बनाई थी।
इसके लिए चार साल तक उनकी टीमों ने पंजाब में वर्क किया। आखिरकार ब्यास के पास जमीन को खरीद लिया गया और इस पर चारदीवारी कर फैक्टरी लगाने की तैयारियां शुरू कर दी गई लेकिन सरकारी तामझाम ने उनको इस कदर परेशान कर दिया कि कंग व उनकी टीम ने इस प्रोजेक्ट को खटाई में डाल दिया।
खंडहर बना कारखाना
कनाडा के रहने वाले निझ्झर ब्रदर्स ने गांव निझ्झरां में आलू से आटा बनाने का बड़ा कारखाना लगाने की योजना बनाई थी। उनका दावा था कि उनकी निर्यातक इकाई यहां पर तैयार होगी और उनकी इकाई आलू उत्पादकों की फसल का 50 फीसदी हिस्सा खरीदेगी।
इस इकाई का नींव पत्थर सीएम प्रकाश सिंह बादल ने रखा था। उन्होंने अपने भाषण में इस प्रोजेक्ट की खूब तारीफ की थी लेकिन समय व कार्यालयों में धक्कों ने इस प्रोजेक्ट को ग्रहण लगा दिया। अब वहां पर खंडहर बना हुआ है। इकाई शुरू होने से पहले बंद हो गई।
अमेरिकन स्टाइल डेयरी की हालत पतली
गांव चाचोकी नकोदर में अमेरिकन स्टाइल डेयरी खोलने के लिए अमेरिका के एनआरआई ग्रुप ने पहल की।
150 के करीब विदेशी गायों को वहां पर लाया गया और आटोमेटिक सिस्टम, मशीनरी लगाकर दूध उत्पादन का कामकाज शुरू किया गया लेकिन सरकार की तरफ से इस प्रोजेक्ट या कारोबार के लिए कोई सकारात्मक वातावरण नहीं मुहैया करवाया गया और अब इस प्रोजेक्ट की हालत काफी पतली होती जा रही है।
पिम्प पर भी ग्रहण
जालंधर में 2500 करोड़ रुपये की जमीन पर बना पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस को शुरू करने के लिए एनआरआई ग्रुप ने पहल की।
इस प्रोजेक्ट को 131 करोड़ रुपये पर लीज पर लिया गया, जिसमें एनआरआई धालीवाल, एनआरआई दलविंदर सिंह ढेसी, एनआरआई चिकित्सकों ने एक बड़ा हिस्सा डाला। लेकिन इस प्रोजेक्ट को ग्रहण लग गया है।
2011 व 2012 में एमबीबीएस में दाखिला तो हुआ लेकिन 2013 में मेडिकल काउंसिल ने रोक लगा दी। अब यह प्रोजेक्ट अधर में लटक रहा है। एक माह तक इसमें चिकित्सकों ने हड़ताल रखी।
लार्ड स्वराजपाल ने बंद किया प्रोजेक्ट
यूके के लार्ड स्वराजपाल ने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कपैरो-पीटीयू स्कूल खोलने का एमओयू साइन किया था। इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया लेकिन बच्चों को दाखिले के छह माह बाद भी पूरी सुविधाएं नहीं मिलीं।
इसको लेकर काफी शोर शराबा हुआ और यूके के लार्ड स्वराजपाल ने इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया।