डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को माफी व श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के
बाद पंजाब में पैदा हालात के मद्देनजर सिख जत्थेबंदियों की ओर से बुलाए गए
सरबत खालसा को फेल करने के लिए पंजाब सरकार व शिरोमणि अकाली दल मैदान में
उतर आया है।
शिअद के जालंधर व देहाती और सभी विधायकों व मंत्रियों
की बैठक शनिवार को स्थानीय माडल टाऊन गुरुद्वारा में हुई, जिसमें सरबत
खालसा को मर्यादा के उलट बताया गया। इस बैठक में पंजाब के परिवहन मंत्री
अजीत सिंह कोहाड़, योजना बोर्ड के चेयरमैन गुरचरण सिंह चन्नी, सीपीएस
अविनाश चंद्र, सीपीएस पवन कुमार टीनू, विधायक परगट सिंह, विधायक गुरप्रताप
सिंह वडाला, डॉ. एसएस भट्टी समर्थकों के साथ शरीक हुए।
बैठक में
सभी ने सरबत खालसा को पंथ के विरुद्ध बताया और प्रस्ताव पास कर इसका विरोध
किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरबत खालसा बुलाने का अधिकार सिर्फ श्री
अकाल तख्त साहब के जत्थेदार को है। दो बार ही अभी तक सरबत खालसा बुलाया गया
है, जिसको श्री अकाल तख्त साहब के जत्थेदार ने ही बुलाया है।
शिअद
नेताओं ने वर्करों से कहा वह अपने अपने इलाके को पूरा कवर करें और सिख
भाईचारे को यह संदेश दें कि वह सरबत खालसा में हिस्सा न ले और लोगों को इस
बारे में जागरूक करें कि यह पंथ के विरुद्ध है। रविदासिया समाज से संबंधित
पवन कुमार टीनू व अविनाश क्लेर ने भी सिख समुदाय व शिअद के वर्करों को सरबत
खालसा के विरोध में खड़े होने के लिए कहा।