किसी शहर, कॉलोनी या समाज की पहचान केवल उसकी बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों से नहीं होती। असली खूबसूरती तब दिखाई देती है, जब उसके आसपास हरियाली हो, पेड़ों की छांव हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा का इंतजाम हो। एलडिको ग्रीन में हरियाली को लेकर पिछले कुछ समय में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, उसके पीछे एक महिला का जुनून खास तौर पर चर्चा में है सपना तुली।
पेशे से बैंक अधिकारी सपना तुली ने पौधारोपण को अपने जीवन का ऐसा मिशन बना लिया है, जिसके लिए उन्होंने न केवल अपना समय दिया बल्कि अपनी जेब से पैसा खर्च कर हजारों पौधे लगवाए। उनके लिए पौधा लगाना किसी कार्यक्रम की औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। यही जुनून आज एलडिको ग्रीन की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सपना तुली के इसी सराहनीय पर्यावरणीय योगदान को पंजाब सरकार ने सम्मान दिया। समारोह में मंत्री मोहिंदर भगत ने उन्हें सम्मानित किया। सम्मान मिलने के बाद एलडिको ग्रीन के निवासियों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल सपना तुली का नहीं, बल्कि एलडिको ग्रीन की उस सामूहिक सोच का सम्मान है, जिसने पौधारोपण को एक अभियान से आगे बढ़ाकर एक जनअभियान का रूप दिया।
सुबह छह बजे शुरू होती थी हरियाली की यात्रा
सपना तुली की दिनचर्या अपने आप में प्रेरणा देने वाली है। सुबह करीब छह बजे बच्चों को स्कूल भेजने के बाद वह अपनी स्कूटी लेकर अकेले ही निकल पड़ती थीं। न कोई बड़ा काफिला, न कोई प्रचार और न ही किसी तरह का दिखावा।कभी पौधे खरीदने के लिए, कभी उन्हें लगाने की जगह तलाशने के लिए और कभी पहले लगाए गए पौधों का हाल जानने के लिए वह एलडिको ग्रीन और आसपास के इलाकों में घूमती रहती थीं। शुरुआत में यह केवल प्रकृति के प्रति उनका प्यार था। लेकिन धीरे-धीरे यही प्यार जुनून बन गया और फिर जुनून एक अभियान में बदल गया।
एलडिको ग्रीन को सिर्फ कॉलोनी नहीं, हरियाली का घर बनाने का सपना
सपना तुली का सपना केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा। वह चाहती थीं कि एलडिको ग्रीन सिर्फ रहने की जगह न हो, बल्कि हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी पहचानी जाए।
इसी सोच के साथ उन्होंने कॉलोनी के अलग-अलग हिस्सों में पौधे लगाने की मुहिम शुरू की। खाली स्थानों को हरियाली से जोड़ने, नए पौधे लगाने और पुराने पौधों की देखभाल करने के लिए लगातार मेहनत की। धीरे-धीरे लोगों का ध्यान इस अभियान की तरफ गया। कुछ लोग पौधे लगाने में साथ आए, कुछ ने पौधों को अपनाया और कुछ ने उनकी देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। एक महिला की व्यक्तिगत पहल धीरे-धीरे एलडिको ग्रीन की सामूहिक पर्यावरणीय मुहिम में बदलती चली गई।