आप सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा 460 करोड़ के कारोबारी से सत्ता के गलियारों तक पहुंचे। उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। फिर कैबिनेट में अहम जिम्मेदारी मिली। ईडी को यह भी शक है कि अपराध से अर्जित धन को निर्यात कारोबार के जरिये विदेश भेजा गया और बाद में दुबई से भारत लाकर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
आप सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा लंबे समय तक लुधियाना के प्रमुख उद्योगपति और समाजसेवी के रूप में पहचाने जाते रहे। एससीडी सरकारी कॉलेज से बीकॉम करने के बाद उन्होंने कारोबार की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
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रितेश इंडस्ट्रीज लिमिटेड और हैमटन स्काई रियलिटी जैसे कारोबारी समूहों से जुड़े अरोड़ा पंजाब के सबसे संपन्न नेताओं में गिने जाते हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी संपत्ति 460 करोड़ रुपये से अधिक और देनदारियां करीब 37 करोड़ रुपये बताई गई हैं।
राजनीति में उनकी एंट्री 2022 में हुई जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 10 अप्रैल 2022 को वे निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए। सांसद रहते हुए उन्होंने लुधियाना से जुड़े कई विकास प्रोजेक्टों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
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इनमें हलवारा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और ईएसआई अस्पताल के अपग्रेडेशन जैसे बड़े काम शामिल रहे। 2025 में लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी के निधन के बाद हुए इस चुनाव में उन्होंने करीब 10,603 वोटों से जीत दर्ज की।
विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी। इसके बाद 3 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें पंजाब कैबिनेट में शामिल किया। उन्हें उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन, बिजली और एनआरआई मामलों जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
संजीव अरोड़ा की पहचान समाजसेवा से भी जुड़ी रही है। माता-पिता को कैंसर से खोने के बाद उन्होंने ‘कृष्ण प्राण ब्रेस्ट कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट’ की स्थापना की। ट्रस्ट के जरिए 160 से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज कराया जा चुका है।
फर्जी बिलों से लिया गया करोड़ों का टैक्स लाभ
ईडी अधिकारियों के मुताबिक, पूरा मामला फर्जी जीएसटी लेनदेन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि संजीव अरोड़ा ने अपनी कारोबारी इकाइयों के माध्यम से दिल्ली स्थित फर्मों से 100 करोड़ रुपये से अधिक के मोबाइल फोन खरीद के फर्जी बिल तैयार करवाए। इन बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ लिया गया।
इसके अलावा निर्यात से जुड़े जीएसटी रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक का भी फर्जी तरीके से फायदा उठाया गया। ईडी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिये सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
दुबई रूट से ब्लैक मनी को व्हाइट करने का शक
जांच एजेंसियों को संदेह है कि फर्जी कंपनियों और बोगस फर्मों के जरिये रुपयों की लेयरिंग कर लेनदेन को जटिल बनाया गया ताकि रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। ईडी को यह भी शक है कि अपराध से अर्जित धन को निर्यात कारोबार के जरिये विदेश भेजा गया और बाद में दुबई से भारत लाकर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कई संदिग्ध बैंकिंग रिकॉर्ड, कारोबारी दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत मिले हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग और कंपनियां शामिल थीं।
हैम्पटन स्काई रियल्टी भी जांच के दायरे में
ईडी की कार्रवाई जिन पांच स्थानों पर हुई, उनमें चार ठिकाने सीधे तौर पर संजीव अरोड़ा और उनकी कारोबारी इकाइयों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
वहीं एक कार्यालय हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड का भी शामिल है जो एजेंसी की जांच के दायरे में है। ईडी अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार मंत्री को अब विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया जाएगा।
एजेंसी पूछताछ के लिए रिमांड मांगेगी ताकि मनी ट्रेल, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क और विदेशों में भेजी गई रकम से जुड़े तथ्यों का खुलासा किया जा सके। सूत्रों के अनुसार ईडी को उम्मीद है कि हिरासत में पूछताछ से इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।