टांडा उड़मुड़ (होशियारपुर) में कर्फ्यू के दौरान गांव गुराला में कथित तौर पर खुली दुकान की फोटो खींचकर आरएमपी डाक्टर को खबर लगाने और सेहत विभाग और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। इसमें शामिल टांडा के तीन पत्रकारों के खिलाफ पुलिस ने वसूली का मामला दर्ज किया है। पीड़ित आरएमपी डाक्टर जतिंदर सिंह निवासी बैंस अवान के बयान के आधार पर टांडा पुलिस ने अमित खोसला, रविंदर सिंह उर्फ नानकवीर सिंह और कमल अरोड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अपने बयान में जतिंदर सिंह ने बताया कि वह दस साल से गांव गुराला में दुकान करता है। कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण ज्यादातर अपनी दुकान बंद रखता है। गांव में आसपास कोई मेडिकल स्टोर या कोई डाक्टर न होने के कारण अगर किसी को अचानक इमरजेंसी पड़ती है तो वह उसे दवा देता है। पिछले महीने 13 अप्रैल को सरपंच बलजीत कौर ने उसे फोन किया कि गांव में बच्चे बीमार हैं, वह आकर दवा दे जाए। उसने सुबह 6 बजे आकर चार परिवारों के बच्चों को दवा दी। इस दौरान अमित खोसला और रविंदर आए और उसकी दुकान की फोटो खींचने लगे। तब ब्लड प्रेशर चेक करवा रहे मेंबर पंचायत भुल्ला सिंह ने भी उन्हें ऐसा करने से रोका और कहा कि उन्होंने खुद इमरजेंसी होने के चलते डाक्टर को बुलाया है। इस पर वह वहां से चले गए। बाद में गांव की सरपंच ने भी उन्हें फोन पर डाक्टर को खुद वहां बुलाने के बारे में बताया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब वह घर चला गया तो शाम को कमल अरोड़ा ने प्रेस क्लब से फोन करके कहा कि उसकी खुली दुकान की प्रेस रिपोर्टरों ने फोटो खींची हैं और एसएमओ टांडा के पास शिकायत भी पहुंची है। अब उस पर दुकान खोलने का पर्चा दर्ज होगा और सुबह अखबार में खबर भी लगेगी। एसएमओ की ओर से अलग कार्रवाई होगी और 6 महीने जमानत नहीं होगी। इस पर वह काफी डर गया तथा अपने पिता से बात की। उसी शाम उसका दोस्त विलियम उनके घर आया तो उसने कहा कि रविंदर तथा अमित ने उसे जलालपुर बुलाया है। उन्होंने जलालपुर जा कर दोनों के आगे काफी मिन्नतें कि तो उन्होंने कहा कि वह अपने बॉस से बात करते हैं। काफी देर बात करने के बाद उन्होंने कहा कि कमल अरोड़ा कह रहा है कि कम से कम 50 हजार रुपये लगेंगे। उसके पिता ने काफी मिन्नतें कीं और कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं, जिस पर उन्होंने फिर कमल अरोड़ा से फोन पर बात कर की और तीस हजार रुपये में बात तय हो गई। शाम को साढे़ छह से सात बजे तीनों आरोपियों ने उन्हें सरकारी स्कूल के पास बुलाया। उसके पिता ने बीस हजार रुपये दिए तो कमल अरोड़ा ने दस हजार और मांगते हुए कहा कि हमारी तीस हजार में बात हुई है और वह खबर तथा कार्रवाई का डर दिखाने लगा। इस पर उसने अगले दिन अपने चाचा प्रकाश से दस हजार रुपये उधार लेकर जलालपुर जाकर रविंदर और अमित को दस हजार रुपये दिए।
पैसे लेकर इन लोगों ने उसे कहा कि अब हमारी बात खत्म हो गई है और धमकाया कि अगर उसने इस बारे में किसी से भी बात कि तो वह एसएमओ और पुलिस से मामला दर्ज करवा देंगे। बाद में जब उसके साथ हुई वसूली का पता गांव में चला तो रविंदर और अमित ने उसके दोस्त के माध्यम से संदेश भेजा कि उसने किसी से तीस हजार रुपये लेने वाली बात की तो उसका हश्र बुरा होगा। अब जब कर्फ्यू में ढील मिली है तो उसने टांडा पुलिस के पास इस बारे में शिकायत की। पुलिस ने बीती रात मामला दर्ज कर के दो आरोपियों रविंदर और अमित को गिरफ्तार कर तीसरे आरोपी कमल की तलाश शुरू कर दी है।