बताया जाता है कि वारदात के दिन शाम करीब पांच बजे जब पीड़िता का परिवार उसकी तलाश कर रहा था तो दूसरा आरोपी सुरजीत सिंह (सुरप्रीत का दादा) खुद उसके घर आया था। उस वक्त उसने पीड़िता के परिवार को खुद ही बताया कि उनकी बेटी का अधजला शव हवेली में पड़ा है और उसे आग लग गई थी। इसके बाद जब परिवार के लोग वहां पहुंचे तो पीड़िता का अधजला शव वहां पशुओं की खुरली के ऊपर पड़ा था।
अक्सर पीड़िता के घर जा धमकता था आरोपी
पीड़िता की बहन ने बताया कि आरोपी सुरप्रीत अक्सर किसी न किसी बहाने उनके घर आ धमकता था। कई बार उन्होंने उसे समझाया और घर आने से मना किया लेकिन वह बाज नहीं आया। वारदात के दिन भी वह सुबह उनके घर आया और जब उन्होंने वहां आने का कारण पूछा तो उसने छह वर्षीय बच्ची का नाम लेकर कहा कि वह उससे मिलने आया है।
इस पर उसके माता-पिता ने आरोपी सुरप्रीत को वहां से जाने के लिए कहा और खुद काम पर चले गए। शाम को जब वह घर लौटे तो वह गायब थी। बच्ची को घर में न पाकर जब उन्होंने उससे इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि सुरप्रीत उसे कोई खाने की चीज दिलाने के बहाने ले गया था।
परिवार वाले कहते थे, आरोपी मानसिक तौर पर ठीक नहीं
गांव के लोग व सरपंच के पति ने बताया कि आरोपी सुरप्रीत के परिवार वाले कहते थे कि वह मानसिक तौर पर ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि मृतका का पिता कुछ साल पहले आरोपियों के पास ही बतौर ट्रैक्टर ड्राइवर काम करता था और उसकी छह बेटियों में से बड़ी बेटियां भी उनके घर में काम करती थीं, लेकिन सुरप्रीत की हरकतों से परेशान होकर करीब साल-डेढ़ साल पहले उन्होंने काम छोड़ दिया था।
अरोड़ा ने अपनी ओर से दिए ढाई लाख, सरकार की ओर से प्लॉट
राज्य के उद्योग व वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा शनिवार देर शाम पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने पीड़िता के पिता की अन्य बेटियों के नाम पर 50-50 हजार रुपये के फिक्स डिपॉजिट कराने के लिए अपनी ओर से राहत के तौर पर दिए।
इस दौरान अरोड़ा ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने परिवार से मिलने के लिए भेजा है। पीड़ित परिवार किराए पर रह रहा है, लिहाजा सरकार उन्हें 5 मरले का प्लाट गांव में दे रही है। घर बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। उधर, केंद्रीय उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश भी पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे और उन्होंने अपनी ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।