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‘पंजाब फतह’ की राह पर रवनीत बिट्टू: 2027 में बनेंगे BJP का सबसे बड़ा सिख चेहरा!, जीत के मिशन को देंगे धार

Wed, 29 Jul 2026 09:27 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर

सार

भाजपा नेतृत्व ने अभी रवनीत बिट्टू को पार्टी का सबसे बड़ा सिख चेहरा या स्टार प्रचारक घोषित नहीं किया है, लेकिन उन्होंने पंजाब में अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
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रवनीत बिट्टू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू अब पंजाब की राजनीति पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनका यह कदम भाजपा की 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने उन्हें राज्य में संगठन मजबूत करने और चुनावी माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

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जून 2026 में राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भाजपा ने बिट्टू को दोबारा उच्च सदन नहीं भेजा। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा उन्हें लुधियाना सेंट्रल जैसी हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा नेतृत्व ने बिट्टू को पार्टी का सबसे बड़ा सिख चेहरा या स्टार प्रचारक घोषित नहीं किया है, लेकिन उन्होंने पंजाब में अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।

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भाजपा की नई रणनीति और नेतृत्व
भाजपा ने हाल ही में केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया है। ढिल्लों की नियुक्ति के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने उनका स्वागत किया। बिट्टू ने कहा कि मालवा क्षेत्र से भाजपा के चुनावी अभियान की शुरुआत होगी। पार्टी का मानना है कि बिट्टू और ढिल्लों की जोड़ी संगठन को नई मजबूती देगी। यह ग्रामीण सिख मतदाताओं के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी प्रभावी होगी। बिट्टू सोमवार को मालवा के संगरूर इलाके में थे।

ग्रामीण और दलित मतदाताओं पर फोकस
पंजाब में भाजपा की रणनीति अब केवल शहरी वोट बैंक तक सीमित नहीं है। पार्टी ग्रामीण इलाकों, जाट सिख मतदाताओं, दलित समाज, प्रवासी समुदाय और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं तक पहुंच बढ़ा रही है। पंजाब की करीब 32 फीसदी दलित आबादी को साधने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। औद्योगिक शहरों में प्रवासी मतदाताओं को जोड़ने के लिए अलग अभियान चलाया जा रहा है। हालिया निकाय चुनावों में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है।

2027 चुनाव की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पंजाब में अपनी राजनीति का नया अध्याय लिख रही है। शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा। इसमें भाजपा अपने दम पर सत्ता हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेगी। पार्टी को एक मजबूत सिख नेतृत्व की जरूरत थी, जिसे रवनीत सिंह बिट्टू के रूप में सामने लाया जा रहा है। मंत्री पद छोड़ने के तुरंत बाद बिट्टू ने पंजाब का दौरा शुरू कर दिया है। उनकी रैलियां, जनसभाएं और संगठनात्मक बैठकें भाजपा के चुनावी अभियान का प्रमुख हिस्सा होंगी। भाजपा का लक्ष्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है। वह पंजाब की राजनीति में खुद को एक मजबूत और दीर्घकालिक विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि बिट्टू के नेतृत्व, ढिल्लों के संगठनात्मक अनुभव और केंद्र सरकार के विकास एजेंडे के सहारे वह 2027 के विधानसभा चुनाव में नया राजनीतिक समीकरण खड़ा करने में सफल होगी।
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