संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट। 19 सितंबर, 1968 के संघर्ष में जान गंवाने वाले रेल कर्मियों की याद में पठानकोट में 58वीं शहीदी कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें फिरोजपुर और जम्मू मंडलों से हजारों रेल कर्मियों ने भाग लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कॉन्फ्रेंस में रेल कर्मियों की मांगों और निजीकरण के विरोध पर जोर दिया गया।
एआईआरएफ/एनआरएमयू के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों को शीघ्र ही कैडर पुनर्गठन और बोनस का लाभ मिलने की बात कही। आठवें वेतन आयोग के लिए भी बैठकें जारी हैं। जोनल अध्यक्ष एसके त्यागी ने रेलवे में घटती कर्मियों की संख्या और बढ़ती ठेकेदारी पर चिंता जताई। उन्होंने 7 और 8 अक्तूबर को आउटसोर्सिंग के खिलाफ राष्ट्रीय विरोध दिवस में शामिल होने का आह्वान किया। सीटू के उपाध्यक्ष मंगत राम पासला ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों को मजदूर विरोधी बताया। उन्होंने निजीकरण और ठेकेदारी बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। कॉन्फ्रेंस का आरंभ दो मिनट का मौन रखकर और जोनल अध्यक्ष एसके त्यागी द्वारा झंडा फहराकर किया गया। शिव दत्त ने 19 सितंबर, 1968 के शहीदों को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय रेल कर्मी न्यूनतम मजदूरी और महंगाई राहत जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। राज्य सरकार की कार्रवाई में पांच साथी शहीद हुए और कई घायल हुए थे।