पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच दोबारा नजदीकियां बढ़ने की चर्चाओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है। भाजपा के अधिकारिक सूत्र भी बताते हैं कि हरसिमरत कौर बादल को पंजाब में पार्टी का प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनाकर आगे लाने के विकल्प पर मंथन चल रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में 2027 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के दावे और इसके बाद अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर दिए गए बयान ने पुराने सहयोगियों के फिर एक मंच पर आने की अटकलों को हवा दे दी है।
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ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि अगर अकाली दल दोबारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बनता है, तो क्या हरसिमरत कौर बादल को पंजाब में पार्टी का प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनाकर आगे लाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है?
उनके नाम पर किसी औपचारिक मंथन की पुष्टि नहीं हुई है और न ही दोनों दलों ने गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक किया है लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां इस संभावना को चर्चा के केंद्र में जरूर ला रही हैं।
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भाजपा के आला अधिकारिक सूत्र भी बताते हैं कि हरसिमत कौर बादल के नाम पर मंथन चल रहा है। दरअसल, सुखबीर सुखबीर सिंह बादल के सामने पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक और राजनीतिक मोर्चे पर कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हुई हैं।
विवादित फैसलों को लेकर सवाल उठे
सुखबीर को 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब ने धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराया था। उन पर 2007 से 2017 के अकाली शासनकाल के विवादित फैसलों को लेकर सवाल उठे हैं।
वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं के संदर्भ में भी उनकी भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगा है। दूसरी ओर, अकाली नेता विक्रम मजीठिया नशा तस्करी के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। अक्तूबर 2026 में विशेष जांच दल ने उनसे पूछताछ भी की थी।
पंजाब को दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया
भाजपा पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। ऐसे में उसे गठबंधन के राजनीतिक संदेश पर विचार करना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अक्तूबर 2026 को नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने पंजाब को दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया।
चार बार लोकसभा चुनाव जीत चुकीं
हरसिमरत कौर बादल बठिंडा से लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। उन्होंने 2009, 2014, 2019 और 2024 में जीत दर्ज की। वह नरेंद्र मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री भी रह चुकी हैं।
सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उनके पास संसदीय अनुभव और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से संवाद का पुराना परिचय है। महिला मतदाताओं को साधने के लिए हरसिमरत कौर बादल अकाली दल के लिए अहम हो सकती हैं।
केजरीवाल का तंज
वहीं इसपर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 'मजीठिया और अमित शाह जी दोनों बेहद करीबी हैं, बिल्कुल भाई जैसे। मजीठिया के साथ गठबंधन करके अब अमित शाह जी पंजाब से नशा दूर करेंगे। ये दुनिया का आठवां अजूबा होगा। वाह मोदी जी वाह। क्या प्लानिंग की है।'
मजीठिया और अमित शाह जी दोनों बेहद करीबी हैं, बिल्कुल भाई जैसे। मजीठिया के साथ गठबंधन करके अब अमित शाह जी पंजाब से नशा दूर करेंगे। ये दुनिया का आठवाँ अजूबा होगा। वाह मोदी जी वाह। क्या प्लानिंग की है।