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कपूरथला की सेंट्रल जेल में दो कैदियों की मौत

Sat, 29 Mar 2014 10:35 PM IST
अमर उजाला कपूरथला
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माडर्न सेंट्रल जेल थेह कांजला में शुक्रवार देर रात और शनिवार की सुबह दो हवालातियों की बीमारी की वजह से मौत हो गई। इस मामले की जांच थाना कोतवाली पुलिस कर रही है।
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जानकारी के अनुसार रमन कुमार (46) पुत्र गुरदेव कुमार निवासी मेहली गेट फगवाड़ा किसी बीमारी से पीड़ित था। उसे बीते 31 अगस्त को पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान नशीले पाउडर सहित पकड़ा था। तब से ही वह माडर्न सेंट्रल जेल में विचाराधीन था। शनिवार सुबह उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल में दाखिल कराने के लिए ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

वहीं दूसरी तरफ रामदास (56) पुत्र गुरमीत चंद निवासी गांव सुच्ची जिला जालंधर छह माह से मारपीट के मामले में विचाराधीन था। उसकी शुक्रवार की देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे पहले माडर्न सेंट्रल जेल में बने अस्पताल में ले जाया गया और वहां पर फर्स्ट ऐड देने के बाद सिविल अस्पताल कपूरथला रेफर कर दिया गया लेकिन उसकी भी रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है।
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जांच अधिकारी थाना कोतवाली के एएसआई गुरदेव सिंह ने बताया कि रमन कुमार के परिवार से अभी तक कोई नहीं आया है। जब तक उसके परिजन नहीं आते तब तक पोस्टमार्टम नहीं करवाया जाएगा। अगर 72 घंटे बीतने के बावजूद परिवार के सदस्य नहीं आते तो शव का पोस्टमार्टम करवा दिया जाएगा। वहीं रामदास के परिजनों के बयानों के आधार पर 174 की कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही उनकी बीमारी का पता चल सकेगा।
                       
जेल में अब तक हो चुकी हैं 24 कैदियों की मौत
कपूरथला। माडर्न जेल में कैदियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध न होने की वजह से इलाज के लिए सिविल अस्पताल की तरफ रुख करना पड़ रहा है। कई कैदी व हवालाती अस्पताल पहुंचते ही नहीं और बीच रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
कपूरथला में बनाई गई माडर्न सेंट्रल जेल थेह कांजला का 6 नवंबर को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उद्घाटन करके इसे विश्वस्तरीय जेल का नाम दिया था।

हालांकि 15 ही दिन में इन सुविधाओं की पोल उस समय खुल गई थी जब एक खूंखार कैदी के फरार होने के साथ-साथ दो कैदियों की मौत हो गई थी। उसके बाद दो कैदी अन्य बीमारी की वजह से मर गए और नौ माह बाद भी एक अन्य पांचवें कैदी की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इन सब से जेल की सुरक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की सच्चाई सामने आई थी। अब तक जेल में 24 कैदी की मौत हो चुकी है।

माडर्न जेल में पहली घटना 15 नवंबर के मात्र कुछ दिन बाद ही संदिग्ध हालात में कैदी की जेल में बने हाई टेक्नोलॉजी वाले अस्पताल में इलाज न होने के कारण सिविल अस्पताल ले जाते ही मृत्यु हो गई थी। इस घटना को अभी दो दिन ही नहीं बीते थे कि 17 नवंबर 2011 को भी संतोषजनक इलाज न होने के कारण बलदेव सिंह निवासी नकोदर नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद बौखलाए कैदियों ने जहां जेल पर लगभग अपना कब्जा कर पूरी जेल को तोड़फोड़ कर तहस-नहस कर दिया था। मृतकों के परिजनों द्वारा जेल प्रशासन पर उपचार न करने के कई बार गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं पर अभी तक जेल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
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