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लेटकर नहीं बैठकर ली जाती है समाधि

Mon, 10 Feb 2014 11:17 PM IST
अमर उजाला, जालंधर
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज गहन समाधि में हैं या ब्रह्मलीन हो चुके हैं, इसे लेकर जहां चर्चा शुरू हो गई है वहीं साइंस व परम विज्ञान के बीच भी बहस छिड़ी हुई है।
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 इसी बहस के बीच सोमवार को संत बाबा निर्मल दास जी जोड़े वालों ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि समाधि लेट कर नहीं बैठकर ली जाती है। उन्होंने कहा कि समाधि की जानकारी उस व्यक्ति को होती है जो ब्रह्मज्ञानी होता है। बाबा निर्मल दास जी जालंधर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।

रायपुररसूलपुर के संत बाबा निर्मल दास जी ने आशुतोष महाराज की समाधि पर पूछे गए सवाल पर कहा कि समाधि तो होती है। लेकिन इसका बाकायदा उदय होने का समय होता है। संत जब समाधि में जाते हैं तो अपने नजदीकी को पूरा ज्ञान देते हैं और उदय होने का वक्त भी बताकर जाते हैं।
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संत बाबा निर्मल दास ने कहा कि वे हरिद्वार में कई विद्वानों के अलावा शंकराचार्यों के साथ काफी वक्त बिता चुके हैं। संत बाबा मोहन दास समाधि में जाते थे, उनकी समाधि तो नौ-नौ दिन की होती थी। वे बताकर जाते थे। उनके उदय होने का वक्त होता था और वे उसी समय आकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते थे।

उन्होंने कहा कि स्वामी परमानंद हो या परमहंस जी, जो भी समाधि में गए, वे अपने निकटवर्ती को पूरा आगाह करके गए। दूसरे, समाधि बैठकर होती है, लेटकर नहीं। संत जब भी समाधि में या ध्यान लगाते हैं, वे जमीन पर आसन बिछाकर समाधि लेते हैं। तीसरे, उनके शरीर में अगर किसी हिस्से में कट लगा दिया जाए तो वहां से खून नहीं निकलेगा। अब आशुतोष महाराज के शिष्य अगर मानते हैं कि वे गहन समाधि में हैं तो उनको उस साधक को सामने जरूर लाना चाहिए जिसे महाराज आशुतोष बताकर गए हैं कि वे कब लौटेंगे।

इसके अलावा अगर आशुतोष महाराज गहन समाधि में गए थे तो चिकित्सकों को क्यों बुलाया गया? क्यों इंजेक्शन आदि लगवाए गए? क्यों हार्ट को काफी समय तक पंप किया गया? बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि वे अधिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते लेकिन तस्वीर साफ होनी चाहिए।

संत त्याग कर बैठते हैं गद्दी पर
संत बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि दिलीप झा अगर महाराज आशुतोष के बेटे हैं तो भी वे उनके हकदार नहीं हैं। संत जब गद्दी पर बैठते हैं तो सब कुछ त्यागकर ही बैठते हैं। अगर आशुतोष महाराज ने गद्दी पर बैठकर अपनी पिछली जिंदगी व घर से कोई संपर्क या सरोकार नहीं रखा तो अब परिवार का भी उनकी पार्थिव देह पर कोई हक नहीं बनता क्योंकि वे सब कुछ त्याग चुके हैं।













































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































इसके अलावा अगर आशुतोष महाराज गहन समाधि में गए थे तो चिकित्सकों को क्यों बुलाया गया? क्यों इंजेक्शन आदि लगवाए गए? क्यों हार्ट को काफी समय तक पंप किया गया? बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि वे अधिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते लेकिन तस्वीर साफ होनी चाहिए।
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संत त्याग कर बैठते हैं गद्दी पर
संत बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि दिलीप झा अगर महाराज आशुतोष के बेटे हैं तो भी वे उनके हकदार नहीं हैं। संत जब गद्दी पर बैठते हैं तो सब कुछ त्यागकर ही बैठते हैं। अगर आशुतोष महाराज ने गद्दी पर बैठकर अपनी पिछली जिंदगी व घर से कोई संपर्क या सरोकार नहीं रखा तो अब परिवार का भी उनकी पार्थिव देह पर कोई हक नहीं बनता क्योंकि वे सब कुछ त्याग चुके हैं।
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